राजनेता आपस में निकाल रहे,भडास,चलने लगी चर्चायें और बढ़ गई खटास
दिलीप मेहता
Edited by azad nab
मांडलगढ़ 16 जुलाई। भाजपा राजनीति में अब खुला पन सामने आता दिखाई देने लगा है। पंचायत समिति के विकास अधिकारी का तबादला होने के बाद लगने लगा है कि अब प्रभावशाली नेता आपस में भडक निकाले रहे है जिसे मेवाडी में ‘ भडास ‘ कहा जाता है । पहले पं .स. मांडलगढ़ व बिजौलियां में विकास अधिकारी दोनो जगह गुर्जर लगे थे लेकिन बिजौलियां वालो ने अपना तबादला केंसिल करवा लिया था । उस वक्त अपने राम ने बताया था कि दोनो जगहो पर पहली बार गुर्जर अधिकारी लगे है। कहीं यह कालूलाल गुर्जर की पसंद तो नही है ?? लेकिन बाद में मामला ठंडा हो गया । बिते 2–4 दिनो में विकास अधिकारी मांडलगढ़ का अचानक तबादला हो गया । पहले छुट -फूट शिकायतो का दौर जरूर इनके खिलाफ चला लेकिन चल रही चर्चाओं के अनुसार इनके स्टाफ में पिछले काफी समय से उठक पटक चल रही थी । चर्चाओं के अनुसार विकास अधिकारी ने मात्र 2–3 कर्मचारियों को नजदिक रख कर बाकी से दूरी बनाये रखी इससे पासा विपरित हो गया और अंदर बाहर तक विरोध होने लगा जिससे बाते बाहर आती गई और मामला गर्माने लगा । पहले विकास अधिकारी के खासमखास को चलता किया फिर क्रिकेट के खेल की तरह विकास अधिकारी को एक राजनेता की गेंदबाजी ने गुगली फैंक कर आउट रूपी तबादला करा दिया ? इसकी भनक लगते ही प्रधान घनश्याम कंवर ने जोरदार विरोध जताया और खुले रूप से पूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा जिले के भाजपा प्रभारी निहालचंद मेघवाल को हकीकत बयां की। मेघवाल ने उचित भरोसा दिलाया । लेकिन ऐसा लगने लगा है कि अब स्थानीय राजनीति में काफी खिंचतान चलने का दौर शुरू हो गया है । अपनी ईमानदारी के बल पर व अचानक राजनीति में आकर घनशयाम कंवर ने भी प्रधान जैसे महत्वपूर्ण पद लेकर अपनी अलख जगाई है। दुसरी और अपने राम को पहले ही अंदेशा था कि यहां की राजनीति में कालूलाल गुर्जर का दखल तो नहीं ..वह अब सटीक लग रहा है। कारण यह है कि विकास अधिकारी जगदीश गुर्जर का तबादला मांडलगढ़ से आंनदपुरी — बांसवाडा हुवा और अब वापस सुवाणा पं. स. में हो गया है। यह क्षैत्र कालूलाल गुर्जर का है । फिलहाल आगे आनेवाली राजनीति का दौर किस पटरी पर दौडेगा यह देखना है। इस उठक पटक में कौन किस पर भारी रहेगा और किन किन के तबादले होंगे या नहीं..अगले चुनावो से पहले राजनीति क्या और गर्मायेंगी या नहीं..इसका आगे तक क्या असर रहेगी या नहीं.. यह राम ही जाने..?




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