*मधेपुरा:-खाड़ा पंचायत के शास्त्री स्मारक उच्च विद्यालय का बुरा हाल बयां करता ये दास्तान*
👈 चन्दन कुमार झा “दैनिक खोज खबर “उदाकिशुनगंज 👉
*मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज प्रखण्ड के खाड़ा पंचायत के शास्त्री स्मारक उच्च विद्यालय का बुरा हाल बयां करता ये दास्तान !!आज खाड़ा उच्च विद्यालय, जनप्रतिनिधियों व शिक्षकों के बीच में फँसकर बर्बाद हो रही है ! इसकी जिम्मेवारी सिर्फ शिक्षक पर ही नहीं हम सभी ग्रामीण जनता व बच्चे के अभिभावकों पर है जो समाज के स्तम्भ माने जाते है |उन्ही में से एक हम भी है |हमने ये बीरा उठाया है कि हम तब तक समाज के हर उन समस्याओं को शासन – प्रशासन तक पहुँचाते रहेंगे जब तक समस्यायों का पूरा समाधान नहीं हो सके |इन्ही समस्यायों में से एक जटिल समस्या है शिक्षा में कुव्यवस्था को दूर करना और शिक्षा के सही मायने को समाज तक पहुचाना ।उन बच्चो की जो देश के नवनिर्माण में सहायक होंगे और देश के अच्छे भविष्य में से एक हैं ! ये बच्चे चाहे ठण्ड का मौसम हो बरसात का मौसम हो या फिर तप्त धुप हो सभी मौसम में ये बच्चे अपनी शिक्षा ग्रहण करने विद्यालय पहूचते हैं, पर शिक्षण कार्य नहीं मिलने के कारण इनका जीवन बर्बाद नजर अाता है क्योंकि बिहार के चौपट शिक्षा ब्यवस्था ने इन बच्चो के लिए ना ही अच्छी स्कूल का वातावरण की व्यवस्था की है और ना ही शिक्षकों की ! लागातार बच्चे पढ़ाई की समस्यायों से जूझते रहते है !
मिली जानकारी के मुताबिक खाड़ा के पूर्व पंचायत समिति जितेन्द्र पंडित ने शास्त्री स्मारक उच्च विद्यालय खाड़ा के वर्तमान प्रध्यानाचार्य संजीव कुमार व शिक्षकों के द्वारा बच्चे से साईकिल राशि देने के नाम पर कुछ चुनिंदे दुकान का रसीद मांगना व कुछ सेवा शुल्क भी पहले लेने का मामला सुत्रों से बताया है और बताया कि प्रध्यानाध्यापक को अपने परिवार में प्रमुख होने का अलग ही ताकत है जो इनके कार्यों पर सवालिया निशान पैदा कर रहा है !
बच्चे फूलकुमारी व राखी कुमारी के अभिभावक वकील मंडल व संजय झा के शिकायत के अनुसार उच्च विद्यालय का पठन – पाठन का कार्य भी भगवान भरोसे चल रहा है !

इसी क्रम में दैनिक खोज खबर का पत्रकार ने संजीव कुमार (प्रध्यानाचार्य) से फोन पर बात किया तो उनका जबाव आया कि स्कूल में कोई भी कहीं से साइकिल खरीद की पर्ची लेकर जमा कर सकते हैं और इसके लिए हमारी तथा हमारे शिक्षकों की ओर से कोई प्रतिबंध नहीं है दूसरी ओर हमारे विद्यालय में पहले से शौचालय बना है जिसका उपयोग बच्चे कर रहे हैं एवम् स्कूल में स्वच्छता है !उन्हौने बताया कि हमारे विद्यालय में कुल 04 ही शिक्षक हैं जिसमें एक प्रतिन्यूक्त भी हैं हमारे यहां शिक्षकों की कमी है जिसकी भरपाई हम नहीं कर सकते !
*हम क्या कर सकते*?
लेकिन सच्चाई खुद स्कूल बयां कर रही है !
लगता है स्कूल के बच्चे की गुहार सुनने वाला कोई नहीं है ! आज तक के इतिहास में विद्यालय में शिक्षक व अभिभावकों की बैठक होना नहीं सुना है व नही देखा है, ऐसा कहना विद्यालय के बच्चों के अभिभावकों का है ! हम दैनिक खोज खबर के न्यूज के माध्यम से इन बच्चो की गुहार सुशासन सरकार तक पहुचाना चाहते है व इसमें सुधार की विनती करते हैं शिक्षकों की कमी की भरपायी हो व्यवस्था सुदृढ हो ,खोलकूद की व्यवस्था हो एवं स्वच्छता भी !
देखिये क्या कहते है हमारे देश के ये भविष्य ।
उदाकिशुनगंज प्रखण्ड के खाड़ा पंचायत के उच्च विद्यालय का भवन जो बिना चाहरदिवारी का अरसों से चला आ रहा है ,स्कूल में फिल्ड तो बहुत बड़ा है पर खेलकुद का इन्तजाम नगन्य है ! बच्चे – बच्चियों को खुले में शौच के लिए के लिए जाना शर्म की बात है ! जबकि यहां 8 से 10 तक की पढाई की व्यवस्था है !जहां आज केन्द्र सरकार व राज्य सरकार स्वच्छता का पाठ पढ़ाने हेतू ऐड़ी – चोटी एक किये हैं वही यहां के विद्यालय के कमरे को देखने पर पता चल रहा है कि यहां भूत- पिशाच का निवाश ही है !यहां के रिकार्ड का फाइल देखने पर पता चलता है कि बर्षों से धूल की साफ – सफाई नहीं हुयी है !विद्यालय में जमीन के लीज से आये रकम को विद्यालय बिकास में लगाना टेढ़ी खीर दिखाई दे रही है !शिक्षकों से पूछने पर उनके द्वारा बताया गया कि विद्यालय का विकास यहां के सदस्यों पर निर्भर करता है जो खाता का संचालन करते हैं !
जबकि उच्च विद्यालय के अध्यक्ष इस क्षेत्र के जीते हुए एम.एल.ए (विधायक) होते हैं !अधिकारी को भी इन सभी समस्याओं को लेकर कोई ठोस नतीजा निकलने की बाते देखनी होगी !एक तरफ सरकार के नेताओ और मंत्रियो की वादों की बाजार तो वहीं दूसरी तरफ समस्याओं की भरमार सरकार की सारी व्यवस्थाओं की पोल खोलती है ऐसे में सीधे तौर पे हमारा चंद सवाल सरकार व पदाधिकारियों से है कि-
क्या सरकार इन व्यवस्थाओं के बीच बच्चो की भविष्य सुधार पायेगी ?
क्या सरकार इन बच्चों को अच्छे वातावरण में खेलकूद के बिना इनका शारिरिक व मानसिक प्रगति कर पायेगी ? इन सवालो के साथ जनता को भी इंतजार है प्रशासनिक सच्चे वादों के द्वारा स्कूल के सही दिशा निर्देशों का ।आज जहां उच्च विद्यालयों को 10+2 में परिणत किया जा रहा है वहीं इस विद्यालय को देखने वाले के रूप में भगवान ही हैं !मैदान तो ऐसा है स्कूल का कि यहां एक छोटा स्टेडियम बन जाय पर हमें दर्द है कि इसका उद्धार करने वाला अभी तक नहीं मिल पाया है !बच्चे आज जहां खेल-कूद से नौकरी लेने में आगे हो रहें हैं वहीं इस जगह बच्चे विद्यालय के उद्धारक का बाट जोह रहा है !हमें अपने आप जगने व जगाने की जरूरत आन पड़ी है !




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