
⏭बेगुसराय: राष्ट्रीय इलेक्ट्रो होमियो पैथिक साइंसटिफिक सेमीनार का हुआ आयोजन
⏭जल्द से जल्द इलेक्ट्रो होम्योपैथिक को मान्यता दे सरकार: डॉ विद्यार्थी
पुष्पराज कुमार “दैनिक खोज खबर” भागलपुर👉बेगूसराय जिले के बखरी बाजार अंतर्गत साहू धर्मशाला में विष्णु इलेक्ट्रो होमियो रिसर्च लेबोरेट्री एन्ड जन विकास सेवा संस्थान के द्वारा राष्ट्रीय इलेक्ट्रो होमियो पैथिक साइंसटिफिक सेमीनार का आयोजन किया गया, जिसमे पुरे भारत देश से करीब 200 चिकित्सक शिरकत हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन इलेक्ट्रो होमियोपैथिक के आविष्कारक डॉ काउंट सीजर मैटी पर दीप प्रज्वालित कर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ सीताराम पंडित ने कहा कि सरकार अगर हमारी पद्धति को मान्यता दिलाकर सरकारीकरण करती है तो सरकारी खजानों में काफी बचत होगी, क्योंकि हमारी पद्धत्ति की दवाई सबसे सस्ती है और कारगर होती है। लोकसभा में सुपौल की सांसद रंजीता रंजन ने मान्यता को लेकर चर्चा उठाई थी, चर्चा भी हुई थी, आज उसी चर्चा का मंथन व अवलोकन किया जाने पर कार्यक्रम आयोजन रखा गया है किसी कारणवश कार्यक्रम में संसाद महोदया कार्यक्रम में नही शिरकत कर पाई अगले कार्यक्रम में जरूर आएंगे हमे पूर्ण विश्वास है।
वही मौके पर मौजूद मैटी इलेक्ट्रो होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज एन्ड हॉस्पिटल के प्राचार्य डॉ सुभाष कुमार विद्यार्थी ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से बिहार सरकार को सन्देश देना चाहते है कि अब वह दिन दूर नही है जब इलेक्ट्रो पैथिक चिकित्सको का अपेक्षा कर नही चल सकता, इसलिए की संपूर्ण बिहार को स्वस्थ बनाना है तो इलेक्ट्रो होम्योपैथिक को साथ लेना ही पड़ेगा। इलेक्ट्रो पैथिक की दवाई से असाध्य से असाध्य रोग ठीक हो जाते है।
इलेक्ट्रो होम्योपैथिक के जनक डॉ काउंट सीजर मैटी की जीवनी पर चर्चा करते हुए बताया कि इटली में जब आस्ट्रिया और प्रसा की लड़ाई चल रही थी तो देश की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते हुए वहां के शासक ने जमींदारों से जमीन मांगी तो उसमें सबसे ज्यादा इन्होंने ही जमीन दान दिया इससे वहां के शासक ने इन्हें मैटी की उपाधि दी। तत्पश्चात जब चुनाव हुआ तो अपने क्षेत्र के निर्विरोध सांसद चुने गये पांच साल के बाद चुनाव हुई तो दूसरी बार सांसद चुने गये। मैटी साहब को बात बात में लगता था कि हम जनता की सेवा यहाँ से नही कर सकते है तो उन्होंने अपने सांसद पद से इस्तीफा देकर जनता की सीधी सेवा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को चुना और तत्कालीन जितनी भी पद्धत्तिया थी। सबो के पुस्तको का अध्ययन व मनन किया तत्पश्चात उन्हें सभी पद्धत्तिया में कुछ ना कुछ कमी लगा। ऐलोपैथ व होम्योपैथ पद्धत्ति में रोगों से छुटकारा दिलाने के लिए रोगों को दबाती है, जब तक शरीर मे दबाई रहती है रोगों से मुक्त रहते है दबाई ख़त्म होने के पश्चात रोग अपने विकराल में आ जाती है, वही आयुर्वेद इतनी महंगी व दुर्लभ है जिससे गरीबो के पास नही पहुँच पाती है जिससे गरीब अपने रोगों से जूझते ही रहता है यूनानी को मैटी साहब ने गुप्त चिकित्सा कहा था। अंत में डॉ विद्यार्थी ने उपस्थित लोगो से कहा कि आपलोग अपने हिसाब से इलेक्ट्रो होम्योपैथ पर चर्चा करते हुए माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखे, जब बहुत सारे पत्र इलेक्ट्रो होम्योपैथ के बारे में देखेंगे तो अंतः उन्हें इलेक्ट्रो होमियो पैथिक के असलियत समझेंगे और मान्यता देने को मजबूर हो जाएंगे।
वही मौके पर डॉ अर्जुन सिंह ने कैंसर, एड्स जैसे भयानक रोगों के इलाजों को विस्तृत रूप से बताया।
इस मौके पर डॉ विष्णुदेव मालाकार, मनोहर केसरी, जवाहर राय, विद्यानंद महतो, मो तुफैल अहमद, डॉ अशोक कुमार, डॉ हीरा लाल, डॉ प्रिंस, डॉ राकेश कुमार, डॉ श्रवण, डॉ संजय कुमार, सीपीआई के नेता सूर्यकांत पासवान, पूर्व मुख्य पार्षद संगीता राय आदि मौजूद थे। मंच संचालन डॉ राम उदय शर्मा कर रहे थे।




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