​बगहा:- “इंक़लाब ज़िन्दाबाद” का नारा देने वाले मौलाना हसरत मोहानी के पुण्य तिथि पर दी गई श्रधांजली

✍”दैनिक खोज खबर ” विशेष संवाददाता नीरज ठाकुर बेतिया  (पं.च) बिहार 👉 पश्चिम चम्पारण (बगहा):- इंक़लाब ज़िन्दाबाद’ का नारा देने वाले मौलाना हसरत मोहानी के पुण्य तिथि पर बगहाॅ जदयु अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रवक्ता अब्दुल गफ्फार ने श्रधांजली अर्पित करते हुए देशहित में उनके कार्यों से जनता को अवगत कराया।
आज भी हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में अगर कोई आन्दोलन या मूवमेंट चलता है तो ‘इंक़लाब ज़िन्दाबाद’ का नारा उसका खास हिस्सा होता है। हमारे देश की कोई भी सियासी पार्टी या कोई संगठन अपनी मांगों के लिये मुजाहरे और प्रदर्शन करता हैं तो इस नारे का इस्तेमाल आन्दोलन में जान फूंक देता है। भारत की आज़ादी की लड़ाई में तो यह नारा उस लड़ाई की जान हुआ करता था और जब भी, जहाँ भी यह नारा बुलन्द होता था आज़ादी के दीवानों में जोश का तू़फ़ान भर देता था। इन्कलाब ज़िन्दाबाद’ का यह नारा आज़ादी के अज़ीमुश्शान सिपाही मौलाना हसरत मोहानी का दिया हुआ है। भारत की आज़ादी में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने वाले हिन्दुस्तानी रहनुमाओं और मुजाहिदों की फेहरिस्त में मौलाना हसरत मोहानी का नाम सरे फेहरिस्त शामिल है। उन्होंने इंक़लाब ज़िन्दाबाद का नारा देने के अलावा टोटल फ्रीडम यानि पूर्ण स्वराज्य यानि भारत के लिये पूरी तरह से आज़ादी की मांग की हिमायत की थी। 
हकीकत में, देशभक्त होने के साथ-साथ, मौलाना हसरत मौलाना बहुत सारी खूबियों के मालिक थे। वे साहित्यकार, शायर, पत्रकार, इस्लामी विद्वान, समाजसेवक और उसूलपरस्त राजनीतिज्ञ थे। वे बहुत काबिल, ईमानदार और सच्चे मुसलमान थे । साथ ही उन्होंने कम्युनिस्ट विचारधारा को भी आगे बढ़ाया। वे भारत में कम्युनिस्ट पार्टी के फाउन्डर मेम्बरों में से एक थे। वे भगवान श्रीकृष्ण के भी प्रशंसक थे। हिन्दुस्तान पाकिस्तान के बंटवारे के बाद उन्होंने पाकिस्तान के बजाय हिन्दुस्तान में रहना पसन्द किया, किन्तु पाकिस्तान में भी लोग उन्हें उसी सम्मान से देखते हैं जिस तरह हिन्दुस्तान में उन्हें सम्मान दिया जाता है।