एटा पुलिस ने सवा घंटे तक पत्रकार को बेरहमी से पीटा, क्या यही है रामराज?
इकबाल अहमद
एटा 29 अप्रैल। लगता है कि एटा पुलिस समाजवादी सोच से उबर नहीं पाई है।या भाजपा ने भी पुलिस को सपा से ज़्यादह खुली छूट दे रखी है।सपा सरकार में पेट पकड़ पकड़ कर गुंडा राज की दुहाई देने वाले भाजपाइयों की सरकार में हर ओर अराजकता का माहौल है। इस सरकार में आम नागरिक तो क्या समाज का चौथा स्तम्भ कहे जाने वाले पत्रकारों पर भी योगी पुलिस अपनी ज़ोर आज़माई कर रही है। आज भी नियम-कानून और सरकार की नीतियों को बला-ए-ताक रखकर जंगलराज की तर्ज पर कानून व्यवस्था को संभाल रही है। उप्र सरकार की घोषित नीति और मानवाधिकार का सरेआम उल्लंघन नहीं तो क्या है बेकसूर पत्रकार की निर्मम पिटाई का मामला?
सूबे के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी पत्रकारों के हित संरक्षण व सम्मान के लिए नये-नये भारी भरकम दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं। परंतु एटा पुलिस पर इन निर्देशों के विपरीत आचरण कर रही है। या यह कहिये कि योगी जी समस्त घोषणाएं मात्र दिखावा हैं।बीती रात 9.30 बजे स्थानीय नुमायश ग्राउण्ड में स्टेज प्रोग्राम को देखने जा रहे बेकसूर पत्रकार को नशे में धुत मेला चैकी के दरोगा सहित आधा दर्जन सिपाहयों ने बिना बात के खींच कर इस तरह पीटा जैसे कोई बहुत बड़ा आतंकवादी उनके हत्थे चढ़ गया हो।
लाठी-डन्डे, लात-घूंसों से लगातार सवा घण्टे तक अस्थाई चैकी में बंधक बनाकर पीटते रहे ।जबकि पत्रकार बराबर चीख-चीख कर बता रहा था कि मैं पत्रकार विजय वर्मा हूं। परन्तु नशे में धुत इन पुलिस जनों से इससे कोई मतलब नहीं था। पिटाई की बर्बरता का अंदाज इसी बात से लगता है कि पत्रकार के दोनों खंभे से बधवाकर पूरे शरीर पर ताबडतोड डन्डे बरसाये। घटना की भनक लगते नुमाइश ग्राउण्ड में मौजूद कुछ पत्रकार वहां पहुंचे तब उनके विरोध करने पर देर रात करीब पौने ग्यारह बजे उन्हें छोड़ा गया। घटना की जानकारी पीड़ित पत्रकार विजय वर्मा ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरूद्ध पंकज को दी।
आज शुक्रवार की सुबह जंगल में आग की तरह इस खबर की जानकारी जब पत्रकार जगत को हुई तो पत्रकारों में भारी आक्रोश था। सभी पत्रकारों ने पीड़ित पत्रकार विजय वर्मा को लेकर उच्चाधिकारियों से भेंट की और कपड़े उतारकर उनकी पीठ पर पुलिस की बर्बरता के निशान दिखाये। जिस पर उच्चाधिकारी भी बर्बरता की हद को समझ सके। बताते हैं कि घटना की तहरीर मुकदमे के रूप में दर्ज करने के लिए जब कोतवाली नगर जाया गया तो वहां मौजूद अफसर सुलह-समझौते की बात करते रहे।
परंतु पत्रकारों ने इसको सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा विषय बताकर किसी भी कीमत पर समझौता करने की मनाही कर दी। जिस पर उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप से दोपहर बाद मुकदमा अपराध सं0-594/17 के अंतर्गत धारा- 147, 323, 504 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज हुआ। और इस मुकदमे में मेडिकल रिपोर्ट के बाद भा0द0सं0 की और भी धारायें बढ़ सकती हैं। मुकदमा दर्ज होते ही आरोपी दरोगा यदुवीर सिंह यादव और पांच सिपाहियों को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया। घटना की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी दी गयी और मानवाधिकार आयोग को भी अवगत कराया गया है। पीड़ित पत्रकार विजय वर्मा हिन्दी-अंग्रेजी और लखनऊ-आगरा से प्रकाशित आधा दर्जन अखबारों के स्थानीय स्तर पर स्टाफ रिपोर्टर हैं और साप्ताहिक रहस्य संदेश के जिला प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त हैं।
हम ज़िला बिजनौर के सभी पत्रकार एटा के पीड़ित पत्रकार के साथ हैं।और पुलिस की इस बर्बरता कठोर शब्दों विरोध करते हैं।तथा मुख्यमंत्री जी से आरोपियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की मांग करते हैं। यदि ऐसा न हुआ तो पत्रकार संगठन लखनऊ में धरना प्रदर्शन करने के लिये बाध्य होगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी योगी सरकार पर होगी।
एटा जनपदीय पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राजू उपाध्याय ने पुलिसिया उत्पीड़न की इस बर्बर घटना को तीखे शब्दों में भत्र्सना की है और कहा है कि एटा के पत्रकार किसी भी कीमत पर पत्रकारों के सम्मान के साथ समझौता करना पसंद नहीं करते। आज पूरे दिन इस घटना को लेकर राकेश कश्यप, वीरेन्द्र गहलौत पत्रकार, शैलेन्द्र उपाध्याय, अरूण उपाध्याय, प्रवीन पाठक, प्रमोद लोधी, संजीव चैहान, आरबी दुबे, राजीव वर्मा, शैलेन्द्र दीक्षित, प्रवेश दीक्षित, राजेश गुप्ता, दिनेश शर्मा, रवीन्द्र गोला, मुनेन्द्र रावल, कृष्ण प्रभाकर, अमित कुमार माथुर, संदीप शर्मा सहित जनपद के समस्त पत्रकारों में गहमागहमी का माहौल बना हुआ है।




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