वैशाली :सुंदर पंडालों पर दुष्टों की नजर, कर रहा कानून और समाजिक सम्मान के साथ खिलवाड़, होता प्रशासन, होती कन्या हलकान
     
#मुकेश कुमार राय 

जंदाहा
     मुख्यमंत्री का बाल विवाह कानून पर बरती गई सख्ती जनजागरूकता के माध्यम से समाजिक चेतन रूप धारण कर साकार होने के मार्ग पर अग्रसर ही हो रहा है कि शरारती तत्वों के लिये प्रशासन को हलकान करने वाला हथियार भी बन गया ।हलकान प्रशासन ही नहीं, बल्कि दामपत्य धारण करने की दहलीज पर अनंत अरमानों के साथ स्वपनिल दुनियां को सकार होने की कामना लिये सुहाग मंदिर पहुंची लङकी,लङकी पक्ष,और वो समाज जो इसके साक्षी बनने के लिये उपस्थित है ।
               एक अजीबोगरीब स्थिति शरारती तत्वों ने उत्पन्न कर दी ।आज अंजली कुमारी उम्र उन्नीस वर्ष पिता-राम प्रवेश साहनी ग्राम डीह बुचौली के शादी की तैयारी पूर्ण होकर बरात आगमन होना है ।बरात आगमन में महज चंद घंटे बाँकी थी ।दुलारी बेटी के शादी की अद्भुत तैयारी पिता राम प्रवेश ने किया था । स्यंव पंडाल निर्माता होने के कारण सुंदर मनमोहक पंडाल का निर्माण अपनी बिटिया के शादी के लिए किया ।चार महली पंडाल में जगमगाने वाली रोशनी कि चकाचौंधत्ता दुष्टों के कलुषित मन में अशांति पैदा करने लगा और वो अहले सुबह महिला हेल्पलाइन, जिला प्रशासन को नबालिग होने की जानकारी देकर शादी समारोह की तैयारी में चार घंटों का व्यवधान उत्पन्न कर दिया ।सरकार के संकल्पों में एक बाल विवाह की खबर मिलते समूचे प्रशासनिक महकमा में अफरातफरी मच गया और आननफानन में समाजसेवीयों से शादी रोकवाने के प्रयास में जूट गया ।इधर लोगों की लम्बी तैदाद और प्रशासनिक पदाधिकारियों की मौजूदगी देखकर कन्या पक्ष अचंभित होने लगें ।जानकारी प्राप्त होते कन्या पक्ष के लोगों ने स्कूल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड और घोषणा पत्र मौके पर पहुंचे अंचलाधिकारी योगेंद्र सिंह को सुपूर्द कर सूचना देने वाले की जानकारी माँगी ।ग्रामीणों के आक्रोश को पदाधिकारी और समाजसेवीयों ने शादी समारोह का हवाला देकर शांत कराया, लेकिन शरारती तत्वों का कृत शाषन-प्रशासन के लिए कई  चुनौती पूर्ण सवाल दे डाला ।
       आखिर क्या ये असमाजिक तत्वों का ये कारनामा सरकार के उद्देश्य को प्रभावित करने का षडयंत्र करते हुए कानून का मजाक नहीं है ? क्या ये लङकी, लङकी पक्ष का मानसिक दोहन करते हुए सम्मान हरण नहीं करता ? क्या ऐसे कृत्यों से समाजिक समरसता प्रभावित नहीं होती ? क्या ऐसे जघन्य अपराधों के लिये कानून को अपना काम नहीं करना चाहिए ? अब देखना है कि चार-चार घंटे परेशान रहने वाली प्रशासन गलत सूचना देने वालों के विरुद्ध क्या कारवाई कर पाती हैं ?