विकास की राह देखता यूपी – बिहार के सीमा पर स्थित
“सोहगरा का बाबा हंसनाथ धाम”

✍सीवान गुठनी से आनंद प्रकाश की रिपोर्ट
✍भारत के कई प्रदेशों सहित नेपाल से भी दर्शन को आते हैं श्रद्धालु
🔴 सीवान के
दक्षिणी पश्चिमी छोर पर बिहार और उतरप्रदेश के सीमा पर गुठनी थाना क्षेत्र के सोहगरा गाँव मे प्राचीन, ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थस्थलो मे सर्वश्रेष्ठ नवो नाथ महादेव मे शामिल बाबा हंसनाथ शिव मंदिर आज तक अपनी विकास की राह देखता रहा है।यहाँ प्रतिवर्ष केवल सावन मे भारत के विभिन्न प्रान्तो से लाखों श्रद्धालु आते हैं और बाबा हंसनाथ का जलाभिषेक कर अपना जीवन धन्य समझते हैं ।वैसे तो सालोभर यहाँ श्रद्धालुओं का ताता लगा रहता है ।सोमवार और हर महीने के शिवरात्री के दिन तो यहाँ श्रद्धालुओं का जमवाडा लग जाता है।विशेष पर्वो पर भी यहाँ श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था भी चुस्त दुरूस्त रहती है ।उतरप्रदेश के देवरिया जिले के भागलपुर घाट से पवित्र सरयू नदी का जल कावर मे भरकर बोल बम- बोल बम का नारा लगाते हुए श्रद्धालु नंगे पाँव पैदल चलकर सोहगरा धाम स्थित बाबा हंसनाथ महादेव को जलाभिषेक करते है।सावन महीने मे तो केसरिया वस्त्र मे श्रद्धालुओं की लम्बी कतार दिन रात बोल बम का नारा लगाते हुए मन को मोह लेते है ।
👉मंदिर का पौराणिक महत्व :
शिव महापुराण मे सोहगरा के बारे मे विस्तृत वर्णन मिलता है ।जानकर बताते हैं कि द्वापर युग मे बाणासुर नाम का एक प्रतापी राजा शोणितपुर (अब सोहनपुर ,उतरप्रदेश )मे रहा करता था ।वह एक महान शिवभक्त था ।अपने पूजा करने के लिये उसने इस विशाल शिवलिंग की स्थापना किया था ।ऐसा भी बताते हैं कि भगवान भोलेनाथ बाणासुर के भक्ति से प्रसन्न होकर कई वरदान भी दिये थे ।अपने समय मे विश्व मे कोई भी बाणासुर के समान ताकतवर योद्धा नहीं था ।अपने वीरता के अभिमान मे आकर बाणासुर ने भगवान शिव को ही युद्ध के लिए ललकारने लगा।तभी भगवान शिव ने एक ध्वजा दिया और कहा कि जिस दिन यह ध्वजा झुक जायेगी उसी दिन तुमसे लड़ने वाला योद्धा तुम्हारे पास आ जाएगा और तुम्हारे अभिमान को चूर चूर्ण कर देगा।कुछ दिनों बाद बाणासुर की पुत्री उषा यही सोहगरा के शिवमंदिर मे पूजा करने आती है यही पर भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र अनिरूद्ध से उषा को प्रेम हो जाता है और उसी दिन बाणासुर का ध्वजा झुक जाता है ।फिर श्रीकृष्ण और बाणासुर मे भयंकर युद्ध होता है जिसमें बाणासुर हार जाता है उसकी बेटी उषा के साथ अनिरूद्ध का विवाह होता है ।
👉मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक् महत्व :उतरप्रदेश और बिहार के सीमा के बीच स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर छोटी गंडक के किनारे बसा हुआ है ।यहाँ आज भी खेतो मे प्राचीन काल के अवशेष मिल जाते हैं ।शहर के बनावट और रूपरेखा से ऐसा लगता हैकि पूर्व मे यह विकसित शहर रहा होगा ।यह मंदिर सतह जमीन से लगभग बीस – पच्चीस फीट ऊँचा पीले पर बना हुआ है ।मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर बरामदा बना हुआ है पूरब और उतर तरफ सीढ़ियों की सुन्दरता देखते ही बनती है ।गर्भगृह मे लगभग पाँच फीट ऊँचा और तीन फीट चौड़ा बिशाल शिवलिंग है जो बाणासुर द्वारा स्थापित किया गया है ।कलांतर मे मंदिर की अवस्था जीर्ण हो जाने से इसका जीर्णोद्धार मझौली के महाराज हंस द्वारा कराया गया जिससे शिवलिंग का नाम हंसनाथ प्रसिद्ध हो गया ।
👉मंदिर पहुँचने का मार्ग : पूर्वोत्तर रेलवे के मैरवा रेलवे स्टेशन से 13किमी दक्षिण पश्चिमी छोर पर ।गुठनी बाजार से 5कि मी उतर ।जाने के लिए बस टैम्पो हमेशा मिलते है।उतरप्रदेश के देवरिया जिले के भाटपार रेलवे स्टेशन से 5किमी फुलवरिया चौराहा से भी सोहगरा धाम जाने के लिए साधन मिलते हैं ।





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