परसा(सारण)।जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंगीभूत इकाई प्रभुनाथ महाविद्यालय परसा में ऑनलाइन के माध्यम से छात्रों की पढ़ाई शुरू की गई है ।लोक डाउन में बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हुई।ऑनलाइन पढ़ाई करने का बच्चों का सपना पूरा हो गया।ऑनलाइन विडियो के द्वारा पठन-पाठन शुरू हो गया है।पहला दिन ऑनलाइन एप पर 200 बच्चों ने विभिन्न विषयों में भाग लिया प्राचार्य डॉक्टर पुष्पराज गौतम ने अपने शिक्षकों शिक्षिकाओं सहयोग करने के लिए धन्यवाद दिया।सभी सम्मानित शिक्षकों से अनुरोध किया कि वीडियो के माध्यम से आमने-सामने अपनी भाषा में बच्चों को समझाने का प्रयास करें ना की इनसाइक्लोपीडिया ना की यूट्यूब एवं रिसर्च पीडीएफ नेट के माध्यम से समझाने का प्रयास ना करें वह सारा मटेरियल आपके लिए है क्योंकि यहां के छात्र-छात्राओं बहुत जागरूक है बुद्ध कहते हैं जो भय के कारण घुटने टेके खड़ा है वह सत्य को कभी भी न जान पाएगा हम इस योगदान साहस और सेवा के लिए हृदय से आपका अभिनंदन करते हैं आपकी कर्तव्य परायणता और निष्ठा के समक्ष हम नतमस्तक हैं।
रामधारी सिंह दिनकर जी ने रश्मिरथी पुस्तक में लिखा है सत्य लिखा है।सच है विपत्ति जब आती है।कायर को हीदहला ती है।सूरमा नहीं विचलित होते है।
क्षण एक नहीं धीरज खोते
विघ्नों को गले लगाते हैं
कांटों में राह बनाते है।
एक अच्छा माहौल हमें सवांरता है हमें तरसता है और बेहतर तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करता है यही सोच इंसान को ऊर्जा से भर कर उसे प्रफुल्लित कर देती है।विचारों की उर्जा करिश्मे पैदा कर सकती है इंसान की सोच और जीवन शैली को बदल सकती है यदि आपके विचार प्रगतिशील है तो आप विनम्र होंगे दूसरों के विचारों का आदर करेंगे।कुदरत ने सभी को भिन्न-भिन्न प्रतिभाएं और योग्यताएं इसलिए दी है ताकि हम उसका विकास कर सके और समाज के उत्थान में अपनी-अपनी भूमिका निभा सकें यदि सभी में एक सी प्रतिभाएं होती तो हम सर्वांगीण विकास नहीं कर पाएंगे।मनुष्यों में क्या चीज और प्राणियों से अलग है? सामान्य जीवन के भूख,प्यास, निद्रा आदि सभी प्राणियों में होते हैं। परंतु मनुष्य के पास एक चीज विशेष रूप से प्रदत्त है, वह है बुद्धि। उससे उसका विकास हो सकता है, बहुत काम हो सकता है। उससे दुनिया भर की खोज हो सकती है, अंत:की खोज भी हो सकती है। यह बुद्धि ईश्वरीय देन है। उसका सदुपयोग दुरुपयोग जो भी करना चाहो करो। निर्णय भी बुद्धि से होता है जो कार्य आत्म विकास की ओर ले जा रहे हैं वे ठीक हैं, जो उसके विपरीत ले जा रहे हैं वे अनुचित हैं। यदि कार्य जनकल्याण के लिए है तो अच्छी बात है। सभी का कल्याण होता है तो अच्छी बात है। आत्म उत्थान की दिशा में कार्य हो रहा है तो अच्छा है। इसके विपरीत होगा तो उससे हानि होगी और हमारा विकास रुक जाएगा। यह भी समझ नहीं आ रहा है तो परख के लिए सत-असत को समझ लो। अधोगति की ओर ले जाने वाले कार्य असत हैं। अतः देखना है कि हमारे आत्मोथान में बाधक हैं या सहायक हैं। यदि बाधक हैं तो गलत हैं,यदि सहायक है तो ठीक है- उसमें निर्णय आपको लेना होगा कि आत्मोत्थान हो रहा है या जनकल्याण हो रहा है अथवा नहीं। यदि नहीं हो रहा है तो ठीक नहीं है। देखना चाहिए कि हमारी सुख सुविधाएं बढ़ेंगी या दिक्कतें होंगी। मु” मनुष्यों में क्या चीज और प्राणियों से अलग है? सामान्य जीवन के भूख,प्यास, निद्रा आदि सभी प्राणियों में होते हैं। परंतु मनुष्य के पास एक चीज विशेष रूप से प्रदत्त है, वह है बुद्धि। उससे उसका विकास हो सकता है, बहुत काम हो सकता है। उससे दुनिया भर की खोज हो सकती है, अंत:की खोज भी हो सकती है। यह बुद्धि ईश्वरीय देन है। उसका सदुपयोग दुरुपयोग जो भी करना चाहो करो। निर्णय भी बुद्धि से होता है जो कार्य आत्म विकास की ओर ले जा रहे हैं वे ठीक हैं, जो उसके विपरीत ले जा रहे हैं वे अनुचित हैं। यदि कार्य जनकल्याण के लिए है तो अच्छी बात है। सभी का कल्याण होता है तो अच्छी बात है। आत्म उत्थान की दिशा में कार्य हो रहा है तो अच्छा है। इसके विपरीत होगा तो उससे हानि होगी और हमारा विकास रुक जाएगा। यह भी समझ नहीं आ रहा है तो परख के लिए सत-असत को समझ लो। अधोगति की ओर ले जाने वाले कार्य असत हैं। अतः देखना है कि हमारे आत्मोथान में बाधक हैं या सहायक हैं। यदि बाधक हैं तो गलत हैं,यदि सहायक है तो ठीक है- उसमें निर्णय आपको लेना होगा कि आत्मोत्थान हो रहा है या जनकल्याण हो रहा है अथवा नहीं। यदि नहीं हो रहा है तो ठीक नहीं है। देखना चाहिए कि हमारी सुख सुविधाएं बढ़ेंगी या दिक्कतें होंगी। मुख्य बात यह है कि साधन (मींस) क्या है। बुद्धि संकुचित नहीं होनी चाहिए बल्कि विशाल होना चाहिए तो हमारे लिए बंधन का कारण नहीं बनेगी। जो अनावश्यक चीजें हैं उनके संग्रह का प्रयास ठीक नहीं है, यह बुद्धि से निर्णय करेंगे। जो हमें विशेषत: दिया गया है उससे विशेष अपेक्षा होती है। इसका उपयोग वैज्ञानिक खोज में, प्रकृति की खोज में तथा आत्म विकास या अध्यात्म में कर सकते है लिए बंधन का कारण नहीं बनेगी। जो अनावश्यक चीजें हैं उनके संग्रह का प्रयास ठीक नहीं है, यह बुद्धि से निर्णय करेंगे। जो हमें विशेषत: दिया गया है उससे विशेष अपेक्षा होती है। इसका उपयोग वैज्ञानिक खोज में, प्रकृति की खोज में तथा आत्म विकास या अध्यात्म में कर सकते है दीपा मुखर्जी डॉ अनीता सौरव भट्टाचार्य डॉ संजय कुमार सिंह डॉक्टर अनिल डॉ विकास रंजन कुमार वरुण मनोज कुमार अमोद कुमार चंदन प्रकाश मोहम्मद शमीम प्राचार्य डॉ पुष्पराज गौतम ने सभी शिक्षकों को इस सराहनीय कार्य के लिए धन्यवाद दिया है