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राजस्थान:500 सौ करोड़ के विज्ञापन घोटाले के आरोपी चौपड़ा ने किया सरेंडर

राजस्थान:500 सौ करोड़ के विज्ञापन घोटाले के आरोपी चौपड़ा ने किया सरेंडर
आज़ाद नेब ब्यूरो चीफ़ राजस्थान
जयपुर 2 मई।  अशोक गहलोत सरकार के समय राजस्थान में 500 करोड़ रुपए के विज्ञापन घोटालों के फरार आरोपी और क्रियोंस कंपनी के मालिक अजय चौपड़ा ने मंगलवार एसीबी कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया। एसीबी चौपड़ा को कल कोर्ट में पेश करेगी।

आपको बता दें कि क्रियोंस के मालिक और सरकारी विज्ञापनों में भारी गबन के आरोपी चौपड़ा की एड कंपनी ने राजस्थान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से अनुबंधित कर रखा था। जिसके द्वारा सरकार की ओर से विभिन्न समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों को जारी होने वाले विज्ञापन में बड़ा गबन होने का मामला सामने आया था।

प्रारम्भिक जांच में एसीबी ने माना था कि इस मामले में जांच पूर्व सीएम अशोक गहलोत की भी होनी चाहिए दरअसल, चौपड़ा की कंपनी ने सभी सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करीब 500 करोड़ के विज्ञापनों के मामले में बड़ा गबन किया था।

  

तकरीबन 500 करोड़  रुपए का सरकारी नुकसान का अंदाजा लगाया गया था। जिसके तहत बंद अखबारों, चैनलों और मैगजीन के नाम पर विज्ञापन उठाए गए थे। इस मामले में प्रदेश की वसुंधरा राजे ने सत्ता में आते ही जांच करवाई थी। इस जांच में कई सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को दोषी माना गया था।

आज सुबह अजय चौपड़ा भ्रष्टाचार मामलों की विशेष कोर्ट में अपने वकील के साथ पहुंचे। उन्होंने अपने उपर चल रहे सभी मामलों में सरेंडर करने की अर्जी लगाई। कोर्ट में समर्पन करने की सूचना पर एसीबी के अधिकारी भी कोर्ट में पहुंचे। फिलहाल एसीबी ने चौपड़ा को 4 के बजाय एक ही मामले में ही गिरफ्तार किया। चौपड़ा की ओर से लगाई गई चार अर्जियों पर कल सुनवाई होगी।

आपको बता दें कि प्रदेश की पिछली अशोक गहलोत सरकार में सरकार द्वारा प्रदत विज्ञापनों में करीब 500 करोड़ रुपए के घोटाले में क्रियोंस के मलिक के साथ ही डीआईपीआर व राजस्थान संवाद के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आईं थी। सरकार की ओर से निर्देश के बाद एसीबी की शुरुआती जांच में डीआईपीआर के कई आईएएस अफसरों को भ्रष्टाचार में दोषी माना गया था, लेकिन काफी समय से उन पर कार्रवाई नहीं हुई है।

जानकारी के मुताबिक इस विज्ञापन घोटाले की एसीबी के एएसपी मनीष त्रिपाठी ने जांच की थी। उन्होंने 21 अप्रैल 2014 को अपनी पड़ताल के बाद सरकार को रिपोर्ट पेश कर थी। जिसमें तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी सी.के. मेथ्यू, आईएएस अफसर निरंजन आर्य, आईएएस ताराचंद मीणा, आईएएस शेलेन्द्र अग्रवाल, डीआईपीआर के तत्कालीन निदेशक लोकनाथ सोनी और सीनियर आईएएस पुरुषोत्तम अग्रवाल की भूमिका को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया था। इतना ही नहीं इस जांच में नियमों को ताक में रखकर स्वयं सीएम अशोक गहलोत के द्वारा भी इस मामले में सहयोग करने की बात कही गई थी।

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