दस दिनों से ग्रामीण है दहसत में पर कार्यवाही नही के बराबर

बनमा-ईटहरी स्थित बाढ़ आश्रय स्थल जहां हथियार बंद अपराधियों की होती रहती है गतिविधिया

सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) से ब्रजेश भारती की विशेष रिपोर्ट:-
अनुमण्डल क्षेत्र के बनमा इटहरी प्रखंड में बीते एक सप्ताह से मकई के खेत में हथियार बंद अपराधियों के जारी गतिविधी से उत्पन्न भय का माहौल गुरुवार सुबह इस क्षेत्र में महिला के जघन्य हत्या के बाद से और बढ़ गया है। सुबह जैसे ही महिला की शव खेत में मिलने की खबर फैली लोगों के बीच और भय समा गया।
वही लोकल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन की दिनो-दिन बढ़ती सुस्ती से बनमा वासी भय के माहौल में मुंह खोलने को तैयार नही दिख रहा है।
प्रशासन सजग नही –
बनमा इटहरी में बीते एक सप्ताह से मकई के खेत और बाढ़ आश्रय स्थल पर देखे जा रहे हथियार से लैस अपराधियों के विरुद्ध प्रशासन बड़े पैमाने पर सर्च अभियान चलाने के बजाय कुम्भकर्णी नींद में सोई हुई है। वही बुधवार-गुरुवार मध्य रात्रि में हुई घटना के बाद से ग्रामीणों में जबरदस्त डर का माहौल व्याप्त है।ग्रामीणों के मुताबिक प्रशासन द्वारा नाम मात्र का सर्च अभियान चलाया गया जो हास्यास्पद है।
ग्रामीण बताते है कि सच्चाई यह है कि लोकल थाना भी बाढ़ आश्रय स्थल पर जाने से डर रही है, जिस कारण ग्रामीणों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।ग्रामीण कहते है कि अभी बड़ी मात्रा में फ़ोर्स की व्यवस्था होनी चाहिए परंतु स्थिति पूर्ववत है जो चिंताजनक है। क्या प्रशासन कोई बड़ी घटना घटित होने का इंतजार कर रही है।
वही इस संबंध में सिमरी बख्तियारपुर डीएसपी अजय नारायण यादव ने कहा कि पुलिस को सुचना मिली थी कि कुछ लोग आपराधिक किस्म के मकई खेत आदि में शरण लिए हुए है।इस सुचना पर पुलिस द्वारा कार्यवाई की गई है।काफी संख्या में फ़ोर्स मोबलाइज कर के एरिया डोमिनेशन की कार्यवाई की जा रही है और लोगो को इससे भयभीत होने की जरूरत नही है, हम लगातार डोमिनेशन की कार्यवाई कर रहे है।
लुका छीपी का खेल –
करीब एक सप्ताह से बनमा में हथियारों से लैस देखे गये लोगो के संबंध में दो तरह की बात सामने आ रही है।एक ओर ग्रामीण हथियारों से लैस लोगो को नक्सली बता रहे है।वही दूसरी ओर प्रशासन इन लोगो को नक्सली मानने से हिचक रही है।ग्रामीण नाम ना छापने की शर्त पर बताते है कि हथियारों से लैस लोगो की वेशभूषा, बोलचाल, हथियार आदि से वे नक्सली जैसे लगते है, जिस वजह से हम भयभीत है।ग्रामीण बताते है कि कोशी का यह दियारा क्षेत्र पूर्व से ही नक्सली का क्षेत्र बना रहा है।सात नदियों से घिरे इस क्षेत्र के बनमा, लक्ष्मिनियां, हथमंडल डीह, परसाहा, परसबन्नी, हराहरी, भैरहा, तरहा एवं ठढिया बहुअरवा समेत सलखुआ के हथरा, बनकट्टी आदि इलाको में भी हथियारों से लैस अपराधियो की गतिविधि देखी गई है।
परंतु आश्चर्य इस बात कि है प्रशासन द्वारा मात्र एक दिन सर्च अभियान चला कर कार्यवाई की इतिश्री कर दी गई। वही प्रशासनिक सूत्र बताते है कि अभी वर्तमान में जब तक खेत में मकई के फसल है, तब तक खेत में घुस कर सर्च अभियान चलाना संभव नही।सिमरी डीएसपी अजय नारायण यादव बताते है कि हम नक्सली से जुड़े बिंदु को भी देख रहे है, लगातार डोमिनेशन की कार्यवाई जारी है।
दिन के उजाले में भी अंधेरे का डर –
एक सप्ताह से अनुमण्डल अंतर्गत बनमा इटहरी में डर व भय का ऐसा माहौल व्याप्त है जिसकी वजह से लोग दिन में भी ओपी से कुछ दूरी पर स्थित बाढ़ आश्रय स्थल के आसपास से जाने से डर रहे है।ग्रामीण नाम ना छापने की शर्त पर बताते है कि हथियारों से लैस लोगो ने जीना दूभर कर दिया है और प्रशासन सोया हुआ है।ग्रामीण बताते है कि अपराधी खेत में लगी मकई की फसल काटकर  उसे बिछा उस पर आराम फरमाते है। वही फसल काटने का कोई किसान  विरोध करता है उसके साथ मारपीट करते है।जिसके भय से अब किसान खेत खलिहान जाने से बच रहे है।
अपराधियो का उत्पात अब खेत में घास काटने जाने वाली महिलाओ और छोटे – छोटे बच्चे को झेलना पड़ रहा है.क्योंकि ये अपराधी महिला और बच्चों के साथ भी मारपीट कर रहे है.  
कही नक्सली ने तो नही मारा की अफवाह-
गुरूवार की सुबह जैसे ही सरबैला पंचायत के रंगिनिया बहियार के मकई से घीरे गेहूं कटी खेत में एक अज्ञात महिला की शव होने की बात सामने आई.वैसे ही यह खबर फैल गई की नक्सलीयों ने महिला की निर्मम हत्या की।जिस व्यक्ति को यह खबर जहां कांन में पड़ी।वह वही से घटना स्थल की ओर दौड़ पड़ा और देखते ही देखते घटना स्थल पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों की भीड़ शव को देखने उमड़ पड़ी।हालाँकि मृतका के पिता के बनमा ओपी पहुंचने के बाद इस अफवाह पर विराम लगा.यहां बताते चले की इन दिनों बनमा ओपी क्षेत्र के बहियार में लगी मकई के खेत में हथियार बंद नक्सलीयों गतिविधी ग्रामीणों के द्वारा देखे जाने के बाद ग्रामीणों में इसको लेकर खौफ का माहौल कायम है और इसी बात को लेकर यह कयासो का दौर भी बदस्तूर जारी है।