राजीव उपाध्याय की रिपोर्ट:-
मझौलिया पश्चिम चंपारण
पश्चिम चंपारण जिले के गल्ला के थोक बाजारों में चनपटिया, सरिससवा तथा करमवा बाजार की गिनती जिले में प्रसिद्ध बाजारों के रूप में होती थी।लेकिन वर्तमान दौर में करमवा बाजार के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। जहां बाजार की भूमि चारों तरफ से अतिक्रमण का शिकार होकर अब मवेशी बांधने का स्थान बन गया है।जानकारों का कहना है कि आज से दस वर्ष पूर्व जब यहां के सब्जियों को लेकर व्यवसायी जिला मुख्यालय स्थित बाजार समिति में लेकर जाते थे तब उनके सब्जियों के मूल्य का निर्धारण होता था।एक जमाना था जब इस बाजार से हल्दी, लहसुन आदि के लिए मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर के व्यापारी यहां आते थे तथा किसानों के इन सब्जियों को ट्रक पर लोडिंग करा कर ले जाते थे । बताते हैं कि 14 कट्ठा 14 धुर रकबा वाले इस गैरमजरूआ भूमि में लगने वाले बाजार के चारों तरफ से अतिक्रमण कर लिया गया है। इस भूमि पर एक दर्जन से अधिक दुकानें तथा एक दर्जन से अधिक मकान बनाकर इस ऐतिहासिक बाजार का अतिक्रमण कर लिया गया है। जानकारों के अनुसार इस चर्चित बाजार में सब्जियों को लेने के लिए पश्चिम चंपारण को कौन कहे पूर्वी चंपारण से भी लोग शादी ब्याह के अवसर पर थोक भाव में ताज़ा सब्जियों को खरीदने के लिए आते थे ।उस समय इस बाजार से सरकार को काफी राजस्व की प्राप्ति होती थी ।परंतु बाजार समिति की ढीलापन के कारण इसका अस्तित्व गिरते गया तथा बाजार की भूमि को पर अतिक्रमणकारियों की नजर लगते गयी बहरहाल अतिक्रमण कारी झोपड़ी समेत अपने पक्का मकान तथा पक्का दुकान बनाकर सब्जी व्यवसायियों को सड़क पर धकेल दिया गया है। बताते चलें कि आज बाजार की भूमि अतिक्रमण के चलते सड़क पर दोनों किनारे सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शनिवार को बाजार लगता है जिससे आवागमन बाधित हो जा रहा है। जानकारों का कहना है कि चौक स्थित सरकारी विद्यालय के मुख्य गेट तक बाजार लगने से छात्रों को बाहर निकलने में कठिनाई उत्पन्न हो जाती है। जहां छात्रों के साथ घटना घटने की प्रबल संभावना रहती है। सड़क पर लगे जाम के कारण लगभग तीन वर्ष पूर्व इस विद्यालय गेट के बाहर निकलते ही जाम के कारण बस की ठोकर से इस विद्यालय के छात्र की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। वैसे तो छोटी मोटी घटनाएं बराबर अतिक्रमण के कारण होती रहती है। भाकपा माले नेता रिखि साह तथा जवाहिर प्रसाद ने अतिक्रमणकारियों से इस बाजार की भूमि को मुक्त कराकर सड़क के बजाए बाजार की निर्धारित भूमि में बाजार लगवाने की मांग जिला एवं प्रखंड प्रशासन से की है।
नेता द्वय ने बताया कि इसके पूर्व में भी अंचलाधिकारी मझौलिया को बाजार की भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग पत्र सौंपा गया था। परंतु इस पर कोई पहल नहीं की गई ।जानकारों का कहना है कि चार-पांच वर्ष से इस बाजार का डाक बंद है। लेकिन सड़क पर बाजार लगवा कर कौड़ी वसूला जाता है। बताते हैं कि इस बाजार में 3 शेड है जो टूटे-फूटे हैं जिसमें मवेशियों को बांधा जाता है। बताते हैं कि पूर्व में यहां पुलिस चौकी भी थी जब इस बाजार का डाक होता था। उस समय महावीर दास तथा गोपाल दास आदि डाक लेते थे। उन्होंने बाजार को काफी विकसित कर दिया था। माले नेताओं ने प्रशासन से अभिलंब इस बाजार को अतिक्रमण मुक्त करने की मांग की है अन्यथा अतिक्रमण मुक्त नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दिया गया है।





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