दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-

रामनगर के अर्जुन विक्रम साह स्टिडियम में ,

जय सेवा जय बड़ा देव के जयकारों से गूंज उठा रामनगर (पश्चिम चंपारण) की धरती।।।।।

(1) पहांदी पारी कुपार लिंगो- जिन्होंने गोंडी सभ्यता को दुनिया में लाया।
(2) रायतार जंगो- जिन्होंने शादी -विवाह का मीजान दिया, टोटम, गोत्र,गोटूल का संज्ञान दिया। गोंड समुदाय के लोग सदियो से इसी सभ्यता के अंतर्गत अपना जीवन यापन करते आ रहे है , जीवन से ले के मरण तक सारे संस्कार गोंडी व्यवस्था के अंतर्गत ही करते है। गोंड जनजाति का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है, अनेक वीर महापुरुष हुए है इस समुदाय में शिरोमणि राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह, दलपत शाह, वीर नारायण सिंह, वीरांगना महारानी दुर्गावती, गोंड जनजाति भारत के मध्य प्रदेश, छतीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, तेलंगना, आँध्रप्रदेश आदि जगहों पे पाये जाते है लेकिन आधुनिकता ने इनके कल्चर, संस्कृति भाषा को मिटाने के कगार पे ला दिया है। बिहार राज्य के गोंड शिक्षा आभाव और गरीबी के कारण आज अपनी संस्कृति से काटते जा रहे है। 1871 से ले के 1931 तक आदिवासी समुदाय की भारत की जनगणना में सेपरेट कॉलम होता था जिसे बाद में हटा के अन्य कर दिया गया जिसके चलते आदिवासी समुदाय भर्मित हो के सही धर्म अंकित नहीं कर पाते है जिसके चलते आदिवासी समुदाय की पहचान मिटने के कगार पे आ गई है इसको बचने के लिए रामनगर में बिहार राज्य के गोंड, बिहार राज्य गोंड अनुसूचित जनजाति सेवा संघ के बैनर तले हजारो हजार की संख्या में इकठा हो के आज संकल्प लिया की हम प्रकृति को मानने वाले लोग है हम गोंडी कल्चर/धर्म से ही जीवन यापन करेंगे। और 2021 के जनगणना में फिर से सेपरेट कॉलम को लाया जाये इसका पुरजोर मांग बिहार का गोंड और आदिवासी समाज करता है।
मुख्य रूप से मुख्य अतिथि बैद्यनाथ कुशवाहा, दीपक यादव (एम डि बगहा चीनी मिल) , मोहन साह गोंड (जिलाध्यक्ष आदिवासी प्रकोष्ठ ), रविन्द्र साह(रिसर्च स्कॉलर), राम चन्द्र साह श्रीकांत गोंड सुनिता देवी के साथ हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे ।