पढ़िए…शिक्षा की अलख जगाने वाले सरकारी शिक्षक पर दलित छात्रों ने छुआ-छूत का लगाया आरोप
✍🏻कुमार विपेंद्र

सीवान : आजादी को मिले सात दशक बीत गये।मगर सरकार ने जिन शिक्षकों पर छुआ छूत जैसे समाजिक भेद भाव मिटाने की नैतिक जिम्मेवारी दी गई है, उन्ही पर दलितों से छुआ-छूत अपनाने के आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला जो प्रकाश मे आया है वो
सीवान जिले के पपौर दलित टोला गांव स्थित नया प्राथमिक विद्यालय का है।आरोप के मुताबिक उक्त विद्यालय के कुछ शिक्षक और शिक्षिकाएं दलित छात्रों से छुआ-छूत का भेदभाव रखते हैं।दलित छात्रों की कॉपियां चेक करते समय छात्रों को सिर्फ इसलिए दूर रहने की सलाह दी जाती है कि कहीं इनसे शरीर का कोइ भाग छू न जाये।विद्यालय की छात्रा प्रीटी कुमारी,विभा कुमारी,गुड़िया,सूचित, नितीश, राहुल समेत दर्जनों छात्रों ने बताया कि विद्यालय में छुआ-छूत के नाम पर दलित छात्रों को प्रताड़ित किया जाता है।
इस बात की खबर पर आज सैकड़ों ग्रामीण आक्रोशित हो गए और विद्यालय पहुँचकर हंगामा करने लगे।हंगामे की सूचना पर जिला पार्षद जयकरन महतो,पचरुखी उप प्रमुख ओमप्रकाश मिश्रा, भाकपा माले नेत्री कुंती यादव सैकड़ों अन्य लोग पहुच गये।ग्रामीणों का आरोप था शिक्षकों का यह रवैया करीब छः माह से चलता आ रहा है।स्थानीय वार्ड सदस्य राजमती देवी ने बताया कि विद्यालय में तमाम तरह की अनियमितताएं हैं।मिड डे मील में प्रधानाध्यापक धांधली करते हैं।विद्यालय प्रधान द्वारा छात्रों की संख्या बढ़ाकर दिखाई जाती है और सरकारी राशि का ज्यादा उठाव किया जाता है।
वहीं ग्रामीण राजिंद्र राम ,मदुसुदन राम,रामप्रीत राम संजय राम,सुनीता कुँवर समेत दर्जनों लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले विद्यालय के छात्रों का खाता खोलने के नाम पर बड़कागांव स्थित ग्रामीण बैंक के एक सीएसपी संचालक को बुलाकर हेडमास्टर द्वारा प्रति छात्र 100 रूपये की अवैध वसूली की गयी।
छुआ-छूत के सवाल पर विद्यालय प्रधान प्रदीप तिवारी ने आरोपों को निराधार बताया।वहीं अवैध वसूली से सम्बंधित पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में प्रधानाध्यापक ने कहा कि इसमें मेरा क्या दोष है।कोई भी सीएसपी संचालक बिना सुविधा शुल्क लिए काम नहीं करता है।