
दिघवारा (सारण) आस:चौकिए नहीं साहब! यह नशे में बेहोश है, मानो जिंदा लाश है। कहाँ? झझिया डगर एनएच 19पर शुक्रबार दिन है ,शाम 5:30बजे हैं ।पुलिस की संध्या गस्ती निकल चुकी है। शायद ध्यान नहीं गया होगा या नजरअंदाज कर दिया होगा, दिघवारा पुलिस ने।बहरहाल, सरकार की दारू-शराब बंदी मज़ाक बनाकर रह गई है।
बताते चलें कि 2018में सरकार द्वारा शाराब बंदी पर पाबंदी के बाद पियक्कड़ी चौक चौराहे, पेठिया बाजारों में बंद रही, मगर पाबंदी नहीं । पुलिस व उत्पाद विभाग ने अवैध भट्ठियों को खुर्द बुर्द करना, शराब से भरी चार पहिए वाहनों का पकड़ना माफियाओं को जेल भेजना रूटीन वर्क के रूप में जारी रखा। किंतु बड़े गुर्गे हाथ न लगे या पुलिस ने जरूरी नहीं समझी।
सूत्र बताते हैं कि चुआंठ 20से 25रूपए प्लास्टिक पाउज व अंग्रेजी शाराब चाहे कोई ब्रांड हो 200मीली ग्राम 200रूपए,400मिली ग्राम 400और फूल बोतल 800रूपए होमा डिलीवरी जारी है। शराब प्रिय लोगों द्वारा कूटभाषा का प्रयोग होता है। चवन्नी अठन्नी रूपया पउआ आधा सेर आदि। पीने वाले कीर्तन व अष्टयाम जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं । लगभग पूरे जिले के सभी थाना क्षेत्र के हाल एक ही है।
सच तो यह है कि जब तक जन जागरूकता नहीं होगी शराब बंदी, पोलिथीन प्रतिबंध की सफलता संदिग्ध है । गत् वर्ष गड़खा थाना क्षेत्र के भगवानी छपरा गांव की महिलाओं ने अपने ही परिवार के पियक्कड़ों के खिलाफ जेहाद छेड़ दी थी ,किंतु बसंतपुल के पास भगवानी छपरा व बनवारी बसंत अब पियक्कड़ी का अड्डा है। गत गुरुवार को डेरनी थाना क्षेत्र के ग्राम विश्वम्भरपुर धरम बागी के सामने ट्रक से टकरा कर जख्मी पूर्व सैनिक कामेश्वर राय नशे में बाइक चलाते हुए दुर्घटना का शिकार हुआ और पीएमसीएच पटना में जिंदगी व मौत से युद्ध कर रहा है




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