छपरा: सारण के बनियापुर प्रखंड के एक छोटे से गांव हरपुर कराह में जन्मे रमन त्रिपाठी आज सामाजिक सरोकार में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। बचपन से मेधावी छात्र रहे रमन ने अपनी जिद की बदौलत एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका का सफर तय किया। पेशे से इंजीनियर रमन ने अमेरिका में अपनी जिद की बदौलत खुद की साँँफ्टवेयर कंपनी खोल ली। आज देश के नामी इंजीनियरिंग काँलेज से पास आउट छात्रों को जाँब मुहैया करा रहे हैं। अमेरिका में रहते हुए भी उनका नाता गांव से नहीं टूटा। उन्होंने गांव व समाज के लिए कुछ करने की जिद की। उन्होंने ट्राईडेंट सेवा समिति ट्रस्ट की स्थापना की। उन्होंने अपनी जिद की बदौलत कुरुक्षेत्र, बनारस, विंध्याचल के कई मंदिरों के रख रखाव में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। इतना ही नहीं इनके दिए सोलर प्लांट से मंदिर परिसर जगमग हो रहे हैं। अपनी जिद से छपरा के बाढ़ पीड़ितों के बीच भोजन पहुंचाया। मुजफ्फरपुर में महादलित बस्ती को चापाकल देकर व छपरा के जलालपुर में पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण व भव्य समारोह आयोजित कर मिशाल कायम की। स्व. डा. नागेंद्र त्रिपाठी व स्व. लीलावती त्रिपाठी के पुत्र रमन त्रिपाठी की पढ़ाई झारखंड के धनबाद में हुई। इंटर पास करने के बाद मणिपाल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इनके छोटे भाई राहुल त्रिपाठी भी अमेरिका में इंजीनियर हैं।

देश मे एक लाख मंदिर होंगे चकाचक

रमण त्रिपाठी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों से धर्म की क्षेत्र में जुड़कर मैं मंदिरों के निर्माण ,कायाकल्प, प्राण-प्रतिष्ठा आदि कार्य कर रहा हूँ। अपने कामकाज से हटकर मुझे मंदिरों के काम करने में सुखद अनुभूति होती है। आनंद आता है, मंदिरों के काम से मेरी आत्मा जुड़ी हुई है।
हमने अब तक 600 मंदिरों के लिये काम किया है, जिसमे देश के कई बड़े बड़े शक्ति पीठ भी शामिल है। और निरंतर आज भी कर रहा हूँ, मेरा लक्ष्य है एक लाख मंदिरों को चकाचक करना, उनमें लाइट, पंखे, पीने के लिये शुद्धजल, श्रद्धालुओ को बैठने की जगह का निर्माण, मूर्ति स्थापना आदि का संकल्प है।रमण त्रिपाठी ने कहा कि हो सकता है कि एक लाख मंदिरों को चकाचक करने में मेरा यह जीवन कम पड़ जाये , लेकिन मैंने इस कार्य को ट्रस्ट का रूप दिया है। ताकि आने वाले लोग इस ट्रस्ट से जुड़कर इस लक्ष्य को पूरा करेंगे।