मढ़ौरा (सारण ) । बाबा साहब का पूरा जीवन समरस समाज बनाने एवं समाज में दलितों पिछडो को उचित स्थान दिलाने के लिए समर्पित था । वे जाति पाति में जकड़े समाज को मुक्त करने के लिए आजीवन प्रयत्नशील रहें थे ।
उक्त बातें अवारी पंचायत के असाँव में भाकपा एवं किसान सभा द्वारा आयोजित बाबा साहब की जयंती सभा में भाकपा जिला सचिव रामबाबू सिंह ने कहीं । जयंती समारोह कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुये सामाजिक दूरी कायम रखते हुये बाबा साहब के तैल चित्र पर माल्यार्पण के साथ प्रारंभ हुआ । रामजतन मांझी की अध्यक्षता में आयोजित जयंती सभा का संचालन हरेश कुमार ने किया । भाकपा नेता ने आगे विस्तार से बाबा साहब के जीवन चरित और संघर्षों की चर्चा करते हुये कहा कि बाबा साहब का जीवन अछूतों के उद्धार के लिए आजीवन समर्पित रहा था । उन्होने 1927 में अछूत सम्मेलन का आयोजन किया । 1930 मे अखिल भारतीय दलित समाज की स्थापना किया और 1935 में दलितों पिछडो के आरक्षण की मांग किया और भारत के संविधान में इनके उत्थान के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान किया । आज जरूरत है उनके विचारों को मूर्त रूप देने की । प्रो भूपेश प्रसाद ने कहा कि बाबा साहब ने जिस संविधान में सबों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की स्थापना किया था आज सरकार द्वारा उसकी धज्जियां उड़ायी जा रही है । दलितों पर अत्याचार, धर्मनिरपेक्षता को तार तार कर बाबा साहब के सपनों को धूल धूसरित कर रही है । जयंती समारोह को प्रो रजाक हुसैन, संजय सिंह,भरत राय-,हरेश कुमार, रामानाथ मांझी, मोहन मांझी , लालबाबू महतो, जमादार राय, अजय कुमार यादव, छात्र नेता धर्मवीर कुमार, कमरुद्दीन साहब ने भी संबोधित किया । अंत में उपस्थित जन समुदाय को भारतीय संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करने को तत्पर रहने की शपथ दिलायी गयी ।