वैशाली के दो गांव ऐसे की विकास की बाट जोहते पथरा गयीं आँखे, आज भी चचरी पुल के सहारे लोगों का हो रहा हैं आवागमन
गोरौल-बेनीपट्टी पीरापुर एक संपर्क पूल के अभाव में मजीराबाद व मधुरापुर पूर्वी के लोगों को आज भी बांस का चचरा बनाकर गंडक नहर को आर-पार होना पड़ता है। वर्षो से ऐसा अभिशप्त जीवन जीने को विवश गांव के लोगों को सरकारी सुविधाओं का बाट जोहते-जोहते आंखें पथरा सी गई है,लेकिन सरकार एवं अधिकारी सहित जनप्रतिनिधि भी यहां की सुध लेना वाजिब नहीं समझे। स्थानीय श्याम किशोर,सकलदेव सिंह,रामकेवल सिंह,अमोद कुमार,मनोज कुमार सिंह,प्रमोद कुमार,ललन सिंह,राकेश कुमार, दिनेश कुमार,दिलीप कुमार सहित अन्य बताते हैं कि इस चचरी पुल को पार करते समय कई छोटी-बड़ी घटनाएं घट चुकी है।यहां कई बड़े हादसों का शिकार होने से लोग बच चुके हैं।बताते चलें कि यहां के लोगों की खेती बारी गंडक नहर के पार ही है और इसे लेकर आना जाना लगा रहता है।