जहां न्याय है वहां धर्म है और जहां धर्म है वहां न्याय है -गोपालाचार्य स्वामी जी महाराज

छपरा /सारण
रामानुज सम्प्रदाय के महान सेनानायक परम पुज्यपाद त्रिडण्डी स्वामी के शिष्य सुदर्शन पीठाधीश्वर वेदांत मार्तण्ड जगत गुरू गोपालाचार्य स्वामी जी महाराज के अमृत मय भागवत कथा मे कहा जहां न्याय है वहां धर्म है और जहां धर्म है वहां न्याय है ।भागवत मनुष्य को आनन्द प्राप्त करने का साधन है ।आनंद कही बाहर नही मनुष्य के अन्दर है।कथा उस आनन्द तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करती है ।संत के पास राजा रंक फकीर सभी अपना दुख दर्द सुनाते है और संत उन्हे आनन्द का रास्ता दिखाते है।मनुष्य को विचार करना चाहिए कि क्या वह अपने साथ न्याय कर रहा है ? कथा मे जो सुने उसका मनन कर जीवन मे उतारे तभी आनंद की प्राप्ति संभव है ।
ऐसे महान संत की मधुर वाणी से कथा के रोचक तथ्य पर प्रकाश डाला गया ।जिनके दर्शन मात्र से ही मनुष्य का कल्याण संभव है ।
साभार :मनोरंजन पाठक /छपरा




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