छात्र छात्राओं की असफलता का जिम्मेदार कौन ?
*शिक्षा, शिक्षण और शिक्षक*!
चंदन कुमार झा ,दैनिक खोज खबर ,मधेपुरा !
अबकी बार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित इंटरमीडिएट परीक्षा 2017 में बड़े पैमाने पर छात्र-छात्राओं ने असफलता रूपी भयावह दरिया में डूबा !
इसका जिम्मेवार कौन ? सरकार, अभिभावक , छात्र-छात्राएं , शिक्षण संस्थान या शिक्षक । यह एक यक्ष प्रश्न बनकर प्रदेश के बुद्धिजीवियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है। मानव समाज रूपी समंदर में गोता लगाकर जवाब ढूंढे तो जवाब है छात्र-छात्राओं के चंद आधारहीन बिंदुओं को छोड़कर सभी।
परीक्षा परिणाम के विरोध में यत्र-तत्र माननीय मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के विरुद्ध छात्र-छात्राओं के द्वारा नारे लगाए जा रहे हैं और पुतला दहन किया जा रहा है । मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री का ही पुतला दहन क्यों ? क्या केवल सरकार ही जिम्मेवार है ? नहीं। केवल सरकार ही नहीं छात्र-छात्राएं व अभिभावक भी जिम्मेवार है । तकनीक के इस युग में छात्र-छात्राओं के पास एंड्राइड फोन का होना परीक्षा परिणाम पर हथौड़े की भांति चोट कर रहा है। छात्र-छात्राएं अपना अधिकांश समय पढ़ाई करने के बजाय फेसबुक व्हाट्सएप्प व गूगल पर बर्बाद करते हैं । भागदौड़ भरे इस युग में जीवन की रफ्तार को गति प्रदान करने के लिए तकनीक का होना अति आवश्यक है लेकिन हमारे देश के भविष्य कहे जाने वाले छात्र-छात्राएं इस तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं । ज्ञान की सभी बातें गूगल पर मौजूद हैं लेकिन ज्ञानार्जन के बजाय छात्र- छात्राएं फेसबुक व व्हाट्सएप्प की दुनिया में खोए रहते हैं । इसका जीता-जागता सबूत वर्तमान समय में फेसबुक व व्हाट्सएप्प के इतिहास को खंगाल कर देखा जा सकता है । आज परीक्षा परिणाम के गिरते हुए स्तर को देखकर पूरे प्रदेश की जगहंसाई हो रही है। जिसका आधार बिंदु है एंड्राइड फोन ।
*शिक्षण संस्थान और शिक्षक* —
वर्तमान समय में प्रदेश में विद्यालयों- महाविद्यालयों के चमचमाते हुए ऊंची-ऊंची भवनों की कमी नहीं है और तो और भवन निर्माण में भी कोई कमी नहीं है । लेकिन प्रदेश के लगभग सभी शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों का घोर अभाव है। विषयवार शिक्षकों की कमी है । गरीबों के बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु महाविद्यालय में नामांकन तो ले लेते हैं लेकिन शिक्षकों के अभाव में वह दृढ़ इच्छाशक्ति के सहारे ही स्वध्याय करते रहते हैं। *बिन गुरु ज्ञान कहां* यह उक्ति सर्वथा सत्य है और वर्तमान समय में चरितार्थ भी हो रहा है । परिणाम…. सबके सामने है।
इन परेशानियों से निजात पाने हेतु सरकार को चाहिए की प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए व योग्य शिक्षकों की नियुक्ति किया जाए ताकि गरीबों, दीन-हीनों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें ।
*अभिभावकों की जिजीविषा*—
अभिभावक अपनी अपूर्ण महत्वकांक्षा को अपने बच्चों के माध्यम से पूर्ण करवाना चाहते है जो कतई उचित नहीं है । अधिकांश अभिभावक चाहते है मेरा बच्चा विज्ञान पढ़े । डॉक्टर या इंजीनियर बने जबकि बच्चे की रुचि विज्ञान पढ़ने में है ही नहीं । कुछ बच्चे की रुचि गायन में, खेल में या अन्य कलाओं में होती है लेकिन अधिकांश अभिभावक बंधु उनकी इच्छा को दरकिनार कर अपनी महत्वकांक्षा को पूर्ण करवाना चाहते है । परिणामस्वरुप इस थोपे गए भार को सहन न कर पाने की वजह से बच्चों के पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ता है और असफलता रूपी भयावह परिणाम जगजाहिर होता है। जिस युग में बिहार विश्व के मानस पटल पर महान शिक्षा केंद्र के रूप में छाया हुआ था उस युग में शिक्षकों के सम्मान में कोई कमी नहीं थी। शिक्षकों के प्रति अटूट श्रद्धा ने ही बिहार के नौनिहालों को कीर्तिमान स्थापित करने को मजबूर कर दिया था लेकिन आज क्या हो गया है वर्तमान शिक्षा केंद्र को ? क्या हो गया है गुरुजनों को ? गहन चिंतन करने की आवश्यकता है । जहां कहीं शिक्षण संस्थान में शिक्षक हैं भी तो उन्हें बार-बार प्रताड़ित किया जाता है भला-बुरा कहा जाता है । क्या ? कभी किसी अभिभावक के द्वारा शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाता है. क्या कोई अभिभावक शिक्षकों के समक्ष अपने बच्चों के बारे में बात करता है… नहीं… बिल्कुल नहीं । पुत्र मोह में पुत्र के वक्तव्य को सत्य मानकर शिक्षकों को भला-बुरा कहने में तनिक भी नहीं हिचकता है । शिक्षकों के अपमान का परिणाम है छात्र छात्राओं की असफलता ।
वर्तमान सरकार ने जिस प्रकार शराबबंदी के प्रति जोर लगाया शायद इतना ही जोर अगर *शिक्षा, शिक्षण और शिक्षक* के प्रति लगाया होता तो आज हम जगहसाई के पात्र न बनते। अतः बच्चो को उच्च शिक्षा के प्रति उच्च सफलता प्राप्त करने हेतु जागरुक व प्रोत्साहित करने के लिए भी तरह-तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए और शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाना चाहिए ताकि कालांतर में कभी ऐसी घिनौनी जगहँसाई न हो।





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