चार साल से जिनके आने का था इंतजार, मंगलवार को आई उनकी मौत की खबर
#इराक में इस्लामिक आतंकवादी संगठन के शिकार हुए सीवान के दो लाल
✍दैनिक खोज खबर ऑनलाइन वेबपोर्टल के लिए ” परमार डाॅट काॅम ”

🌐मंगलवार की सुबह सीवान के ससराव सहित पुरे देश के लिए एक दुखद खबर लेकर आया । पिछले चार वर्षों जिनके सकुशल घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था,मंगलवार की सुबह उनकी मौत की खबर ने पुरे देश को झकझोर कर रख दिया ।
गौरतलब हो कि 40 भारतीयों इराक में आतंकवादी संगठनों के द्वार 2014 में बंधक बना लिया गया था।बंधक बनाए गए 40 भारतीय नागरिकों में सीवान के अन्दर प्रखंड के ससरांव गांव के भी दो युवक शामिल थें । मंगलवार की सुबह स्थानीय प्रशासन ने ससरांव गांव जाकर दोनों युवको के परिजनों मिलकर उनके मौत की खबर दी ।
बता दे कि ससरांव के मधुसूदन तिवारी के 35 वर्षीय पुत्र विद्या भूषण तिवारी व चन्द्र मोहन सिंह के 30 वर्षीय पुत्र संतोष कुमार सिंह 2013 के दिसंबर माह में नौकरी करने के लिए इराक के मोसुल शहर गए हुए थें और वे वहां के टैक्सटाइल मील में काम करते थें ।
विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार 2014 जून   में इस्लामिक आतंकवादी संगठन ने इराक के मोसुल में लापता 39 भारतीयों की हत्या कर दी गई थी। इसकी जानकारी मंगलवार को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में दी। उन्होंने ये भी बताया कि आईएसआईए ने 2014 में 40 भारतीयों को मोसुल में किडनैप कर लिया था, जब इन्होंने भागने की कोशिश की तो आतंकियों ने इन्हें मार डाला, जबकि इनमें से एक बच निकलने में कामयाब हो गया।

मोसुल की आजादी के बाद इन भारतीयों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह खुद इराक गए थे। यहां उन्होंने भारतीयों के शव जमीन से खोदकर निकलवाए थे और डीएनए सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भिजवाया था।
विदेश मंत्री ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि करीब चार साल से ये तलाश चल रही थी। डीप पेनिट्रेशन रडार के जरिए इराक में बॉडी को देखा गया था।उसके बाद सभी शवों को खुदाई कर जमीन से बाहर निकाला गया था। इसमें पहचान को लेकर हाथों के कड़े जैसे कई निशान मिले थे और डीएनए जांच के बाद इसकी पुष्टि हुई।

उन्होंने बताया कि डीएनए टेस्ट में सबसे पहले संदीप नाम के लड़के का पता चला। इसके बाद सोमवार को 38 अन्य लोगों के डीएनए मैच होने के पता चला।
बता दें किडनैप किए गए 40 भारतीयों में से एक हरजीत मसीह आतंकियों के चंगुल से बच निकला था। मसीह ने बताया था कि उसने बाकी भारतीयों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा था।
उन्होंने बताया कि विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह फिर इराक जाएंगे, जहां से सभी शवों को भारत लाया जाएगा। इसके बाद जो लोग जिस प्रदेश के है वहाॅ उनकी शव को पहुंचाया जाएगा।