इस्राईल की क्रूरता और फ़िलिस्तीन में सिसकता बचपन
खबरें देश विदेश ः अब्दुल मुत्तलिब रज़ा
फ़िलिस्तीनी बच्चों की गिरफ़्तार और उनको जेल में डालने की प्रक्रिया पर नज़र दौड़ाने से यह पता चलता है कि फ़िलिस्तीन बच्चों के साथ ज़ायोनी शासन कैसा व्यवहार करता है।
यहां पर आपको यह बताते चलें कि फ़िलिस्तीनी बच्चों के विरुद्ध जातिवाद की यह कटु घटना, उनके जन्म से ही आरंभ हो जाती है और 1948 की धरती में फ़िलिस्तीनी माओं को प्रसव के समय यहूदी माओं से अलग कर दिया जाता है।
18 वर्ष के कम आयु के फ़िलिस्तीनी बच्चों की गिरफ़्तारी की प्रक्रिया में ज़ायोनी कट्टरपंथियों के हाथों मुहम्मद अबू ख़ुज़ैर की पाश्विक हत्या के बाद तेज़ी आ गयी। इस अपराध पर अवैध अधिकृत बैतुल मुक़द्दस और पश्चिमी तट के युवाओं ने भारी आपत्ति जताई।
16 वर्षीय मुहम्मद अबू ख़ुज़ैर का अपहरण उस समय कर लिया गया जब वह 2014 में सुबह की नमाज़ पढ़ने के लिए मस्जिद जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शी स्थानीय फ़िलिस्तीनियों के अनुसार पांच कट्टरपंथी ज़ायोनियों ने मस्जिद पहुंचने से पहले ही मुहम्मद अबू ख़ुज़ैर का अपहरण कर लिया था और उसके कुछ घंटे बाद उसका जला हुआ शरीर पश्चिमी बैतुल मुक़द्दस से मिला, चाक़ूओं से शरीर के अंगों को क्षत विक्षत कर दिया गया था।
पहले और दूसरे इंतेफ़ाज़ा का आरंभ और गिरफ़्तारियों में तेज़ी
फ़िलिस्तीनी बच्चों की गिरफ़्तारियों का क्रम 1967 से आरंभ हुआ जब इस्राईल ने पश्चिमी तट और ग़ज़्ज़ा पट्टी का अतिग्रहण किया था। वर्ष 1987 में फ़िलिस्तीन के पहले इंतेफ़ाज़ा के आरंभ होने से गिरफ़्तारियों का क्रम तेज़ हो गया। गिरफ़्तार बच्चों पर इस्राईली सैनिकों और उनके सैन्य वाहनों पर पथराव करने के आरोप होते हैं। वर्ष 2000 में फ़िलिस्तीन के दूसरे इंतेफ़ाज़ा की लहरें आरंभ होने के बाद बच्चों की गिरफ़्तारियों में बहुत अधिक वृद्धि हो गयी और 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे भी बड़ी संख्या में गिरफ़्तार किए गये।
फ़िलिस्तीन बच्चों की गिरफ़्तारियों के आंकड़ेः
ज़मीर नामक क़ानूनी संस्था की ओर से जारी आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2017 में 300 से अधिक फ़िलिस्तीनियों को गिरफ़्तार करके जेल में डाला गया जबकि वर्ष 2016 और 2015 में क्रमशः 400 और 470 बच्चों को गिरफ़्तार या हिरासत में लिया गया । वर्ष 2014 में 1266 से अधिक 18 वर्ष के कम आयु के बच्चे गिरफ़्तार हुआ जबकि वर्ष 2013 में इनकी संख्या 931 थी जबकि वर्ष 2000 से अब तक 12 हज़ार से अधिक फ़िलिस्तीनी बच्चों को हिरासत में लिया जा चुका है।
ज़ायोनी शासन फ़िलिस्तीनी बच्चों के परिजनों को बच्चों की स्वतंत्रता के बदले भारी भरकम राशि लेते हैं। गिरफ़्तारी की वजह से कई बच्चे मानसिक रोगों में ग्रस्त हो जाते हैं जिसके कारण उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है।
गिरफ़्तारी और क़ुबुलवाने के तरीक़े
इस्राईली सैनिक आधी रात के बाद यह सुबड़ तड़के बच्चों को गिरफ़्तार करने के लिए फ़िलिस्तीनियों के घरों पर छापे मारते हैं।
बच्चों से पूछताछ के दौरान उनके परिजनों के सामने नहीं होती है।
आरोपियों को वकील करने की अनुमति नहीं होती।
फ़िलिस्तीनी बच्चों से हेब्रू भाषा में लिखे काग़ज़ पर हस्ताक्षर कराया जाता है या अंगूठे लगवाए जाते हैं जबकि बच्चों को हेब्रू भाषा नहीं आती।
इस्राईल की ख़ुफ़िया एजनेसी और पुलिसकर्मी बच्चों को डराते हैं कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों को यदि स्वीकार कर लें तो स्वतंत्र हो जाएंगे और यदि उन्होंने इन्कार किया तो उनके माता पिता को भी गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।
पूछताछ के दौरान बच्चों को बुरी तरह मारा पीटा जाता है।
बच्चों के हाथ प्लास्टिक के रिबन से बांध दिया जाता है।
बच्चों को गालियां भी दी जाती हैं और उनका अपमान भी किया जाता है।
उनको जान से मारने की धमकी भी दी जाती है।
जेल की हालतः
फ़िलिस्तीन के राष्ट्रीय सूचना केन्द्र के अनुसार जिन जेलों में बच्चों को रखा जाता है उनकी बहुत ही दयनीय स्थिति होती है। बच्चों को खाने पीने को कम दिया जाता है, सफ़ाई नाम मात्र होती है और कीड़े मकोड़े बहुत अधिक होते हैं, सेल में बहुत कम लाइट होती है, देखरेख करने वाला और डाक्टर की सुविधा नहीं होती तथा बच्चों को मनोरंजन की सुविधाओं से वंचित रखा जाता है।




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