खगड़िया की रहने वाली” राधा यशी “किसी भी परिचय की मोहताज नही। नारी शोषण के लेख से कई पुरस्कार से सम्मानित है ।खगड़िया की बेटी ने  साहित्य के क्षेत्र में धूम मचा रखी है। नववर्ष के मौके पर छोटी सी कविता दैनिक खोज खबर के पाठकों के सामने प्रस्तुत:-

प्रस्तुतकर्ता :-कुंज बिहारी शास्त्री जिला सवांददाता मधेपुरा

संकलन :-नौशाद आलम सवांददाता चौसा मधेपुरा 




नववर्ष 

नया साल का महीना आ गया 
मस्ती करने का जमाना आ गया 


भूली बिसरी यादों को संजोना आ गया 
नए सिरे से जिंदगानी निभाना आ गया ।


रूठे को मनाने का बहाना आ गया 
रिश्तों को दिल से सजाना आ गया ।


जख्मों को भूलने का बहाना आ गया 
गमगीनों को हंसाने का करीना आ गया ।


मुसाफिरों को मंजिल का ठिकाना आ गया 
लाज बचाने को वतन का दीवाना आ गया ।


कलियों को चमन में मुस्कुराना आ गया 
बहारों का मौसम सुहाना आ गया ।


दरिया दिली सभी को दिखाना आ गया 
 रीत मोहब्बत की  हमें समझाना आ गया ।


गीत इन्सानियत का गुनगुनाना आ गया 
“राधा ” को नववर्ष की बधाई  दर्शाना आ गया ।




स्वरचित राधा यशी