🔴🔴शक्ल कि न तो सूरत होती है गजल 🔴🔴

प्रस्तुति :-कुंजबिहारी शास्त्री “दैनिक खोज खबर” जिला संवाददाता ,मधेपुरा 



संकलन :-नौशाद आलम


बेगुसराय जिले के छोटी बलिया की रहने वाली रेशमा रानी पेशे से दोनो पति पत्नी शिक्षक है । बच्चे को नियमित शिक्षा देना इनकी आदत में शुमार है ।गरीब बच्चे को मुफ्त में शिक्षा एवं कापी कलम किताब स्लेट पेंसिल देना ताकि कोई भी बच्चा अशिक्षा के कारण अंधकार में न रहे इसी बीच कुछ वक्त अपने मन को हल्का करने के लिए कविता भी लिख लेती है कुछ अंश कविता के में दैनिक खोज खबर के पाठकों के सामने पेश किया हूँ ।
 

गजल 


इसकी शक्ल 
न तो कोई 
सूरत होती है 
पर,
मेरे दोस्तों ने कहा 
कि… जिन्दगी 
बहुत खूबसूरत होती है ,
जब 
मैंने देखा 
अपनी ही जिन्दगी को 
थोड़े करीब से 
जाने क्यों 
मुझे यह लगी 
कुछ अजीबो गरीब से ,
सुख का 
साथी कहूँ 
या फिर इसे 
दुख की कहूँ सहेली 
कभी सुलझी हुई लगे 
तो कभी 
उलझी हुई पहेली ,
यह जितनी करीब 
ग़म के 
खुशियों से 
उतनी ही दूर है 
होंठ हंसे तो हंसे 
आँखों को 
रूलाती जरूर है, 
सपने दिखाती 
तो उसे 
तोड़ती भी है 
वहीं टूटे हुए दिलों को 
कभी जोड़ती भी है, 
इस तरह 
जिन्दगी के कई 
रंग और रूप होते हैं 
कहीं ठंडी छाँव तो 
कहीं कड़ी धूप होते हैं ,
हाँ….
इसकी शक्ल 
न तो कोई 
सूरत होती है 
फिर भी यह जिन्दगी 
बहुत खूबसूरत होती है ।

रेशमा रानी 
शिक्षिका सह कवियत्री
म.वि.बलिया  (बेगूसराय)