सारण :ननबैंकिंग कंपनी इंडस वेयर इंडस्ट्रीज ने करोड़ो का चुना लगा हुआ फरार

⏭️एजेंट व ग्राहकों ने मढौरा एसडीओ को दिया शिकायत पत्र
 
दैनिक खोज खबर ब्यूरो सारण 
तरैया से मनोज कुमार की रिपोर्ट 
              दिल्ली की एक ननबैंकिंग कम्पनी इंडस वेयर इंडस्ट्रीज ने तरैया समेत क्षेत्र के सैकड़ों ग्राहकों व एजेंटों का लगभग एक करोड़ रुपया लेकर फरार हो जाने का मामला प्रकाश में आया है.अप्रैल 2017 में मैच्यूरिटी भुगतान करने के दो माह पूर्व जनवरी 2017 में हीं अपना बोरिया बिस्तर बांध कम्पनी फरार हो गई.करोड़ो का चूना लगता देख ग्राहक व एजेन्ट सामने आए और स्थानीय अधिवक्ता से मिल एसडीओ के पास शिकायत दर्ज कराया.जानकारी के अनुसार उक्त कम्पनी का ब्रांच मशरक में खुला था. कम समय में राशि दुगुना चौगुना के लालच में भोले-भाले जनता से मोटी राशि जमा करने के बाद उन्हीं को बाद में एजेंट बना दिया गया. अब वे दूसरे ग्राहक से राशि जमा कराने लगे. कमीशन भी अच्छा मिलने लगा.  इसके बाद कम्पनी अपना नाम बदल- बदल कर इन ग्राहक सह एजेंटों को कम्पनी में बतौर कर्मचारी बहाल कर उन्हीं का पैसा फिक्स पेमेंट के रूप में देने लगा और बदले में टारगेट के अनुसार पैसा जमा करवाने लगा. इस दौरान ग्राहक एवं उस कम्पनी के एजेंटों के माध्यम से लगभग एक करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा करा कर उक्त कम्पनी चम्पत हो गई है. इस संबंध में पीड़ित एजेन्ट परमात्मा सिंह, मो0 सरफुद्दीन, तारकेश्वर प्रसाद, राजू सिंह, सुनीता देवी, नीतू देवी, धनन्जय सिंह, शैलेश साह, मुन्ना कुमार, गीता देवी, उपेन्द्र सिंह आदि ने बताया कि उक्त कम्पनी हमलोगों से पहले कार्य कराकर वेतन भी दिया.जब हमलोगों को उक्त कम्पनी ने वेतन देना शुरू किया तो हमलोग भी जी जान लगा कर उस कम्पनी के लिए कार्य करने लगे.  हमलोग उस कम्पनी को एक करोड़ रुपये से अधिक का बिजनेस दिया. बीच बीच में कम्पनी अपने अलग-अलग नामो से हमलोगों से कार्य करवाने लगी और जब कम्पनी के पास मोटी रकम जमा हो गई तो इसी बीच उक्त कम्पनी चम्पत हो गई.कम्पनी का जहा ऑफिस था वो भी बंद हो गई है. कम्पनी के ठगी के शिकार ग्राहक सह एजेन्ट तरैया के लालबाबू राम, शैलेश कुमार साह, उपेन्द्र सिंह, तारकेश्वर प्रसाद, वीरेन्द्र मिश्र, धनंजय सिंह, सुमन कुमार पाठक, नीतू देवी, मढ़ौरा के राजू सिंह, पानापुर के मिथिलेश कुमार सिंह, संजू कुमारी, गीता देवी, मुन्ना कुमार साह, पूनम देवी, माघर के परमात्मा सिंह समेत करीब तीन सौ लोगों के माध्यम से करोड़ो रुपये जमा करा कर कम्पनी चम्पत हो गई.