​*मधेपुरा विधायक  प्रकरण: जिंदगी की जंग लड़ रहा है लक्ष्मण, आहात में परिवार*
👈रविकांत कुमार”दैनिक खोज खबर” मधेपुरा,बिहार👉
बिहारीगंज विधानसभा क्षेत्र के विधायक निरंजन मेहता प्रकरण में 9 अप्रैल को विधायक की गाड़ी से सड़क हादसे का शिकार लक्षमण अब बेहोसी अवस्था में ही सिलीगुड़ी के अस्पताल से वापस घर में भगवन भरोसे जिंदगी की आखिरी लड़ाई लड़ रहा है । और उनकी बूढी विकलांग माँ अपने बेटे के दीदार को तरस गए  है। *दैनिक खोज खबर के टीम को छाती पिट पिट कर अपना दुखड़ा सुनाती है* होऊ बाबू हमर शुग्गा कुछ ने बोलय छे हो कोना के रहबे हम सब। शुग्गा हमर कुछ ने बोलय छे हो बाबू।  पीड़ित लक्षमण की पत्नी ने अपना दुखड़ा सुनाते हुवे कहा की अब तो लोग हमारी जमीन भी गिरवी नही ले रहे है और रुपया नही होने के वजह से सिलीगुड़ी के पारामाउन्ट अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया की आठ रोज घर पर रखिये और रूपये का इन्तजाम कर फिर दिखाने लाइयेगा।
मामला 9 अप्रैल की है जब रजनी पोखर टोला निवासी 45 वर्षीय लक्षमण साह गेंहू पिसाने जा रहे थे , उसी क्रम में विधायक की गाड़ी से सड़क हादसे का शिकार हो गया ।उन्हें क्या पता था कि उनका गंतव्य जिंदगी और मौत के बीच अटक जायेगा। लक्षमण के इस हालात का जिम्मेवार कोई और नहीं बल्कि क्षेत्रीय जदयू विधायक निरंजन मेहता को ठहराया जा रहा , जिस समंध में पीड़ित लक्ष्मण के परिजनों के द्वारा विधायक निरंजन मेहता के खिलाप मधेपुरा पुलिस कप्तान के पास गयी थी,  मामला सत्ताधारी पक्ष के विधायक का होने के कारण मामले को दर्ज करने कि हिमाकत पुलिस के द्वारा नही की जा सकी लेकिन पुलिस कप्तान विकास कुमार के निर्देश पर मुरलीगंज थाना में मामले को दर्ज कर अनुसंधान के नाम पर टालमटोल किया जा रहा है। 

सिलीगुड़ी अस्पताल से पिता के साथ लौटे लक्ष्मण के पुत्र रविशंकर कुमार ने बताया कि मुझे जानकारी मिली कि विधायक की गाड़ी ने मेरे पिताजी को ठोकर मार कर जख्मी किया गया है तो हम बिहारीगंज अस्पताल पहुंचे तो वहाँ चिकत्सको ने बताया की पूर्णिया ले जाओ, लेकिन बिहारीगंज पुलिस ने हमे सादे कागज पर दस्खत करने को कहा तो हमने कहा की इस पर तो कुछ लिखा नही है, तो पुलिस ने कहा की दस्खत नही करोगे तो नही ले जाने देंगे तब हमने दस्खत कर दिया था।
*अपने ही बयानों में घिरते नजर आ रहे माननीय विधायक जी*
मानवता को शर्मसार कर एक जनप्रतिनिधि विधायक की कार्यशैली पर लोग अब सवाल उठा रहे है कि जब उनकी गाड़ी से ठोकर लगने के आरोप लगाये गए तो भी विधायक गरीब घायल लक्ष्मण की खोज खबर भी लेना मुनासिब नही समझा। आज चौदह दिन बीतने के बाद भी उन्हें किसी भी प्रकार का सहयोग नही प्राप्त हो पाया है। इस मामले में माननीय विधायक के द्वारा मीडियाकर्मियों को दे रही अलग अलग बयानों में खुद ही घिरते नजर आ रहे है। कभी कहते है की मैं नही था, तो कभी कहते है कि मैं खुद उसे उठवा कर अस्पताल भेजवाया तो कभी कहते है मेरे काफिले से ठोकर लगी है , तो कभी कहते है कि वेहोसी अवस्था में हमलोगो ने पाया। विधायक के इन सभी अलग अलग मीडियाकर्मी को दिए गए बयानों से ऐसा प्रतीत होता है कि उन पर लगाये जा रहे आरोप में सत्यता हैं। 
ख़ैर जो भी हो इस बात की पुष्टि दैनिक खोज खबर फ़िलहाल नही करती है। अब देखना यह है कि पुलिस के अनुसंधान से गरीब परिवार को किस हद तक न्याय मिल पाती है।