नालियों,कीचड़ मे अपना मुक्कदर तलाश करता देश का भविष्य
डॉ0 अनवर कमाल की कलम से
नालियों और कीचड़ में अपना मुक़द्दर तलाश करता हुआ देश का भविष्य।गरीब,असहाय और मजबूर लोगो की फरियाद सुनने वाला कोई नही। बाल श्रम विभाग हो या समाज कल्याण विभाग पिछड़ा वर्ग आयोग हो या अल्पसंख्यक विभाग या फिर मानव अधिकार आयोग हो या शिक्षा का अधिकार सबके सब हैं बेकार। क्योंकि सरकार उन नन्हे हाथो से मजबूरी का कीचड़ छुड़ा पाने में भी सक्षम नही है जिन नाजुक हाथों में कलम किताब और कॉपी होनी चाहिए। शासन/प्रशासन से जुड़ा हर जिम्मेदार।
मंत्री/अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बच कर महज़ कागजों का पेट भर कर खाना पूर्ति करने में मगन।।जहां एक ओर सरकारअनिवार्य शिक्षा का ढिढोंरा पीट रही है वहीं सच्चाई इसके विपरीत है।अपने पद की गरिमा और कर्तव्य का पालन करना तो दूर रहा शिकायतों के बावजूद इनके कानों पर जूं तक नही रेंगती। क्या योगी युग में भी ये मजबूर बच्चे अपने परिवारों की परवरिश के लिए अपना भविष्य कीचड़मय बनाते रहेंगे। कागजों का पेट भरने से भूंखों का पेट नही भरेगा।अधिकारीयों को काल्पनिक बातें छोड़ कर यतार्थ की ज़मीं पर उतरना होगा। सम्बंधित विभाग के कर्मचारियों को कम से कम हफ्ते में 2 दिन डोर टू डोर,/स्ट्रीट टू स्ट्रीट/रोड टू रोड सर्वे अनिवार्य किया जाना चाहिए।तथा प्रत्येक बच्चे का ब्यौरा संकलित कर उनके व् उनके परिवारों के हित में आवश्यक कार्यवाही की जानी चाहिए
क्योंकि उ0प्र0 को पहली बार एक आदर्श मुख्य मंत्री मिला है जो सबका साथ-सबका विकास की निति पर कार्य करने के लिए बचन बद्ध है।भृष्टाचार,रिश्वतखोरी और लाल फीताशाही का नामो निशां मिटा देने का संकल्प लेने वाले मुख्यमंत्री मा0 योगी आदित्य नाथ जी से इस प्रदेश की गरीब मजबूर और असहाय जनता को बहुत अपेक्षाएं हैं।




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