
“दैनिक खोज खबर”नरकटियागंज से अर्जुन भारतीय की रिपोर्ट:- नरकटियागंज और आस-पास बहने वाली जीवनदायिनी हरबोड़ा नदी, जो कभी खेती और पशुओं के लिए वरदान हुआ करती थी, इनदिनों अभिशाप साबित हो रही है,. अब यह नदी इतनी प्रदूषित हो गई है कि किसान खेत को सिंचित करने की कौन कहे पशु भी पीने से हिचकते हैं. कभी जीवनदायनी कहलाने वाली यह नदी कई घरों को बीमार बना चुकी है और कई घर के लोग मौत को गले लगाने को तैयार बैठे हैं. इस नदी का काला जल, जीवन विहीन और सड़क के किनारे ट्रैकर से दूषित पानी गिराते है जो जहरीली बन कर नरकटियागंज नगर ही नहीं अपितु सम्पूर्ण क्षेत्र को अपने दुर्गन्ध से बदहाल कर रही है. लेकिन इस ओर प्रशासन, राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान ही नहीं हैं. आम लोगों में यह चर्चा का विषय है कि अधिकारी, नेता,लोक तंत्र का चौथा स्तंभ और अन्य प्रबुद्ध लोगों को सुविधा मुहैया कराने वाला चीनी मिल क्षेत्र को प्रदूषित करे तो कोई बात नहीं? क्योंकि मीलहों के पूर्व नीलहे यही काम किया करते रहे है. इसलिए इस क्षेत्र की जनता यह सब जानकार चुप है कि अधिकांश जनप्रतिनिधि प्रबंधन के लिए कार्य करते हैं. प्रदुषण और बिजली उनके लिए कोई मुद्दा ही नहीं है। उल्लेखनीय है कि नरकटियागंज चीनीमील को किसी अधिकारी का कोई खौफ है नहीं, जिसके कारण वह खूब मनमानी करता हैं. ईमानदार कहे जाने वाले जिला पदाधिकारी भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे है, नरकटियागंज के भूगर्भीय जल का सर्वाधिक उपयोग करने वाला न्यू स्वदेशी सुगर मील क्षेत्र के लोगों को कोई सुविधा नहीं देता है. जबकि कंपनी अधिनियमों की तहत बिजली, पानी, स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधा देना कंपनी की बाध्यता होती है .लेकिन कारखाना वाले और जनप्रतिनिधियों को बस अपनी जेब और पेट का ख्याल रखना होता है. आम जनता खासकर किसान जाएं भांड़ में किसी चुनाव लड़ने के लिए चंदा तो सिर्फ चीनीमील ही देता है. किसान बताते हैं कि चीनी मील नरकटियागंज के प्रबंधन की उदासीनता के कारण किसानो के गन्ना चंपारण के किसान समस्या को लेकर गाँधी के सत्याग्रह की कड़ी को बढाने वाले किसी मसीहा की प्रतिक्षा है. यहाँ तक कि गाँधी के चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष में कोई नया किसान आन्दोलन प्रारंभ कर मीलहों के आतंक से मुक्ति दिलाने को कौन गाँधी सामने आयेंगे. अन्यथा स्थानीय मिल प्रबंधन चंद्रशेखर नोपानी को तो कोर्ट में पहुंचा ही चुके हैं और उन्हें सिर्फ अवध सुगर के मालिको को कोर्ट में घसीटवाने से मतलब है न कि किसानो के भुगतान की फिक्र. नियमानुसार चीनीमील द्वारा प्रदूषण फैलाना और कानून की धज्जियाँ उड़ना आम बात है और जिला पदाधिकारी के निदेशों को ठेंगा दिखाना उसकी फितरत बन गई है. कतिपय प्रबंधन परस्त अधिकारी और समाज के प्रबुद्धजनों के कारण उसके विरुद्ध कोई आवाज़ उठाने की हिम्मत नहीं करता.




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