तटबंध के अंदर के लोगों की जिंदगी भगवान भरोसे
सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) ब्रजेश भारती।
कोसी तटबंध के अंदर लोगों की जिंदगी आज भी भगवान भरोसे ही कटती है। आजादी के बाद भी इस इलाके में सुरक्षा, शिक्षा व स्वास्थ्य का भगवान ही मालिक है। हालांकि हर चुनाव में यह मुद्दा बनता है। लेकिन जैसे ही चुनाव समाप्त हो जाता है विकास की भी सारी बातें भी समाप्त हो जाती है। न स्कूलों में शिक्षक मिलते हैं और न ही अस्पताल में डॉक्टर। यातायात विहीन इस इलामें में स्वास्थ व्यवस्था इतना नीचे गिर गया है यहा बने उपस्वास्थ केन्द्र पशुओ का तबेला ला बन कर रह गया है।
कठडुम्मर उपस्वास्थ्य केन्द्र में पहले हर वक्त मरीज की भीड़ लगी रहती थी। यहां एक दशक से ज्यादा समय तक उप स्वास्थ्य केन्द्र लोगों से गुलजार रहता था, अब यह जानवरों का तबेला बन गया है। उप स्वास्थ्य केंद्र में अब आदमी नहीं बल्कि जानवरों का कब्जा है। कठडुम्मर निवासी सुशील कुमार सिह, जितेन्द्र यादव कहते हैं कि अब यहां ना तो चिकित्सक आते हैं एवं ना ही नर्स। कई वर्षों से लोग यहां जानवरों को इस उपस्वास्थ्य केंद्र बांधते व रखते है। पंचायत के पूर्व मुखिया गोपाल कुमार बिंद कहते हैं कि कई बार स्वास्थ्य विभाग से इस उपस्वास्थ्य केंद्र को चलाने की गुहार लगायी लेकिन विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। आज अगर इस ईलाके के लोग रात को बिमार पड़ जाय या फिर किसी प्रकार का स्वास्थ समस्या हो जाये सीधे सिमरी बख्तियारपुर या फिर सहरसा ही जाना पड़ेगा। यहां निवासी करने वाले अधिकांश बड़े परिवार सहरसा व अन्य स्थानों पर जमीन मकान ले या फिर भाड़ा के कमान में रहते है लेकिन जो लोग गरीब है वे आज भी यहा बदत्तर जिंदगी जीने को मजबूर है।





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