हिंदुत्व जीवन जीने का एक तरीका है, यह धर्म मात्र नहीं है
दैनिक खोज खबर के लिये ✍परमार डाॅट काॅम की रिपोर्ट
🌐भारत एक चिरंजीवी राष्ट्र है। हिन्दुत्व हमारी संस्कृति है। यह सर्वपुरातन संस्कृति हजारों साल से भारत वर्ष को एक सूत्र में पिरोये हुए है और मजबूती प्रदान कर रही है। मुगलों एवं अंग्रेजों द्वारा सैकड़ों साल तक भारतीय संस्कृति का दमन करने के बावजूद हिंदुत्व अपनी मौलिकता को बचाए हुए है। पूरी दुनिया में इस समय अशांति का वातावरण फैला हुआ है लेकिन दुनिया के लोग शांति के लिए भारत की ओर देख रहे हैं। ऐसे में समूचे विश्व को एक सूत्र में बांधने की ताकत सिर्फ भारत में ही है क्योंकि यह दुनिया का सबसे पुरातन देश है। अतीत में यह था, वर्तमान में है और सृष्टि के खत्म होने तक रहेगा। भारत की महान संस्कृति हिन्दुत्व पर आधारित है। ऐसे में यह उदार सभ्यता एवं संस्कृति सभी को अच्छी लगती है। भारत में रहने वाले सभी भारतीयों को हिन्दुत्व ही प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि संघ राजनीति नहीं करता। यह हिंदुत्व के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका मतलब सहिष्णुता है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व जीवन जीने का एक तरीका है, यह धर्म मात्र नहीं है। पूरी दुनिया में रहने वाले हिन्दुओं ने हमेशा शांति का संदेश दिया है और किसी देश की स्वतंत्रता में कभी हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की है।
उपरोक्त उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने दिया। वे गत दिनों ओडिशा के ओंगुल में दो दिवसीय प्रवासी कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि हमारी संस्कृति नास्तिक में भी आस्तिकता को खोजती है।




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