सीवान :आरडीडी के आदेश को धता बता पद पर काबिज है लिपिक
#न्यूज़ इनपुट -परवेज़ अख्तर 
 सिवान : 
शिक्षा विभाग में क्लर्कों का नेटवर्क इस कदर हावी है कि उनके खिलाफ यदि कोई आदेश आता है तो उसे वरीय अधिकारी के पास पेश ही नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। इसको लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी चंद्रशेखर राय भी हतप्रभ हैं। गत छह जुलाई को ही क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सारण रामायण राम ने पत्र जारी कर स्थापना में प्रोन्नति लिपिक को तुरंत हटाकर उसे दूसरे संभाग का कार्यभार सौंपने के निर्देश दिए हैं। डीईओ तक यह पत्र न पहंचने के कारण करीब छह माह हो गए, लिपिक अभी अपने पद पर बना हुआ है। 
बता दें कि शिक्षक संघ ने उप निदेशक को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि इस लिपिक को वेतनमान की जानकारी ही नहीं है और उसे प्रोन्नति जैसे महत्वपूर्ण संभाग का कार्यभार दिया गया है। इसकी शिकायत बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई ने अब निदेशक से भी की है। 
उप निदेशक ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखा है कि संघ ने जो कागजात दिए हैं, उससे प्रमाणित हो जाता है कि कार्यवाहक लिपिक दोषी है। उसे 1996 में शिक्षकों के लिए देय वेतनमान की जानकारी है ही नहीं। यह किसी अन्य स्रोत से नहीं, बल्कि स्थापना संभाग से निर्गत ज्ञापांक 1308, 1310 तथा 1312 दिनांक 30 जून 2017 से ही प्रमाणित हो रहा है। इसने वेतनमान 5000-150-8000 के स्थान पर 4500-150-8000 तथा 5500-175-9000 के स्थान पर प्रोन्नति के फलस्वरूप 4500-175-9000 वेतनमान अंकित किया है। इस गंभीर गलती के लिए उप निदेशक ने इस लिपिक को तुरंत स्थापना संभाग के कार्यमुक्त कर दूसरे संभाग में कार्यभार सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह भी लिखा है कि इसे अति आवश्यक समझा जाए। अब यहां से लिपिकों के नेटवर्क का खेल शुरू हो गया। अति आवश्यक इस पत्र को जिला शिक्षा अधिकारी के सामने अभी तक पेश ही नहीं किया गया। लिहाजा क्लर्क अपने पद पर ही जमा हुआ है। इससे यह भी साबित हो रहा है कि अफसर वही कर सकते हैं, जो बाबू चाहेंगे। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रामेश्वर पाठक ने कहा कि सिवान में अधिकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी तो अब निदेशक को पूरे मामले से अवगत कराया गया है।