सारण :शोध छात्र संगठन (आरएसए) के द्वारा कमला राय महाविद्यालय गोपालगंज में बिहार के गिरते उच्च शिक्षा पर सेमिनार संपन्न 

गोपालगंज :06-12- 17 
शोध छात्र संगठन (आरएसए) के द्वारा कमला राय महाविद्यालय गोपालगंज में बिहार के गिरते उच्च शिक्षा पर सेमिनार रखा गया था ।कार्यक्रम की अध्यक्षता संयोजक विवेक कुमार विजय ने किया मंच संचालन विश्वविद्यालय अध्यक्ष अर्पित राज गोलू ने किया कार्यक्रम प्रमुख सहसंयोजक मनीष पांडे मिंटू ने संगठनात्मक विस्तार एवं संगठनात्मक विषय पर विषय प्रवेश कर छात्रों को अपने हक़ की लड़ाई के लिए तमाम छात्र- छात्रओं को एक जुट होकर वि वि प्रशासन के खिलाफ मजबूती से शामिल होने का अहवाहन किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन शिक्षक नेता विश्वजीत चंदेल ने किया कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वजीत सिंह चंदेल ने कहा कि जिस दिन राजभवन में कुलपति बनाने की मंडी खत्म हो जाएगी जिस दिन कुलपति चेंबर में प्रिंसिपलों के तबादले के रेट लगना बंद हो जाएंगे ।जिस दिन महाविद्यालय के प्राचार्य कक्ष में नामांकन की दलाली बंद हो जाएगी व्यवस्था अपने आप सुदृढ़ हो जाएगी। उच्च शिक्षा की जितनी भी कसौटियां हैं, बिहार उन सब में पीछे है. बात प्रति एक लाख युवा आबादी पर कॉलेजों की संख्या की हो या छात्र-प्राध्यपाक अनुपात की, राष्ट्रीय औसत और बिहार की हकीकत के बीच लंबा फासला बना हुआ है। राज्य में बीते कई सालों से सरकारी क्षेत्र में कॉलेज नहीं खुले हैं। यहां सरकारी क्षेत्र के कॉलेजों की कुल संख्या 278 है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2000 के बाद महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में हर साल 350 कॉलेज खुले, यानी एक दिन में एक कॉलेज. लेकिन, बिहार में संबद्ध कॉलेजों की संख्या में सिर्फ 38 का इजाफा हुआ।वर्ष 2013 में ऐसे कॉलेजों की संख्या 378 थी, जो 2014 में बढ़कर 414 हुई. यहां 1970 और 80 के दशक में बड़े पैमाने पर कॉलेजों का सरकारीकरण किया गया था।आबादी के लिहाज से कम कॉलेज उच्च शिक्षा के मामले में एक आंकड़ा गौर करनेवाला है। बिहार में प्रति एक लाख युवा आबादी (18 से 23 आयु वर्ग) के लिए सात कॉलेज हैं, जबकि इसका राष्ट्रीय औसत 27 कॉलेजों का है। पड़ोसी राज्य झारखंड में भी प्रति एक लाख की आबादी पर सिर्फ आठ और पश्चिम बंगाल में सिर्फ नौ कॉलेज हैं।दूसरी ओर पुड्डुचेरी में यह अनुपात 58 कॉलेजों का है. बिहार में 47 छात्र पर एक प्राध्यापक  इसी तरह छात्र-प्राध्यापक अनुपात के मामले में बिहार सबसे पीछे है।यहां एक प्राध्यापक 47 छात्रों को पढ़ाते हैं, जबकि इसका राष्ट्रीय अनुपात 24 छात्रों का है।इस मामले में झारखंड बिहार से भी नीचे है. वहां यह अनुपात 50 छात्रों का है। ओड़िशा में 18 और हरियाणा में 12 छात्रों के लिए एक प्राध्यापक हैं। सात हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इसके लिए बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है।उच्च शिक्षा विभाग इन नियुक्तियों के बाद और 4000 प्राध्यापकों की नियुक्क्ति करेगा।शिक्षकों के खाली पदों के बारे में विभिन्न विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव आये हैं।अगर नियुक्ति की चल रही प्रक्रिया और खाली पदों के प्रस्तावों की संख्या जोड़ दी जायें, तो कुल रिक्तियां 7364 पर पहुंच जाती है। इसका अर्थ यह हुआ कि राज्य के कॉलेजों में शिक्षकों के सात हजार से ज्यादा पद खाली हैं।क्वाॅलिटी एजुकेशन का घोर अभाव बिहार के प्राथमिक स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक में क्वालिटी एजुकेशन का घोर अभाव है।इसकी बड़ी वजह कॉलेजों में शिक्षकों की कमी के साथ-साथ जरूरी आधारभूत संसाधनों-सुविधाओं की कमी है। बीते  वर्षों के दौरान राज्य के कई विश्वविद्यालयों में कुलपतियों तथा कॉलेजों में प्रिंसिपलों की नियुक्ति को लेकर गहरा विवाद रहा।इससे जुड़े मामले कभी सर्वोच्च अदालत, तो कभी निगरानी की कोर्ट में रहे. इससे भी उच्च शिक्षा की तसवीर बदरंग होती गयी। राज्य के विश्वविद्यालयों की कमतर ग्रेडिंग राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की ओर विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों की ग्रेडिंग  निर्धारित करती है।राज्य में मगध विश्वविद्यालय को सी, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय को बी प्लस  और बिहार विश्वविद्यालय को बी ग्रेड मिला है। पटना विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग की प्रक्रिया चल रही है।जहां तक कॉलेजों का सवाल है तो पटना वीमेंस कॉलेज, एएन कॉलेज, मगध महिला को ए ग्रेड मिला हुआ है. चाणक्या लॉ यूनिवर्सिटी और सेंट्रल यूनिवर्सिटी, गया को ए ग्रेड हासिल हुआ है।&nb
sp; इस नजरिये से देखें तो बिहार के युवा राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भले ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते रहे हों, लेकिन हाल के दशकों में राज्य की शिक्षा और परीक्षा की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. इसी कड़ी में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय का हालिया सर्वे बताता है कि प्रति एक लाख युवा आबादी के लिए उपलब्ध कॉलेजों की संख्या के मामले में भी बिहार और झारखंड देश के सबसे पिछड़े दो राज्य हैं।  ऐसे में इन राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र बेहतर उच्च शिक्षा के लिए हर साल दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे है।  कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन महासचिव विशाल सिंह ने किया ।