सारण प्रमंडल के वरीय पत्रकार स्व.अवधेश श्रीवास्तव जी की पुण्य तिथि पर शत-शत नमन
#गुजरें कई साल लेकिन….. ! उनकी विरासत को संभाले उन्हीं के पुत्र किरण हिमांशु कि दर्द भरी उलाहना कलमकारों को……

छपरा 
कोई चलता पदचिन्हों पर कोई पदचिन्ह बनाता है। पिता जी की 9 वीं पुण्यतिथि पर एक बार फिर मेरे शब्द आंदोलन करने के मूड में हैं। सोंचता हूं रूक जाऊं पर जिस परिवार ने तीन पीढ़ियों तक कलम से क्रांति मचा रखी हो मैं उसका एक सदस्य लिखने से रुक जाऊं, थम जाऊं ऐसा संभव नही। इसीलिये अपनी भावनाएं व्यक्त करना जरूरी समझता हूं। पिता जी को गुजरे कई साल हो गये। उनके असमय चले जाने के बाद लगा कि हमने सबकुछ गवां दिया, पर संघर्ष के पथ पर चलना हम जानते थे शायद यही कारण था कि उनके गैर मौजूदगी में भी हमने बहुत कुछ पाया। आठ वर्ष पत्रकारिता से दूरी बनाए रखने के बाद लगा कि पीढ़ियों का यह सफर यूं ही खत्म न हो जाये, लिहाज मैंने अपनी कलम से मोर्चा संभाला। हालांकि बड़े चाचा पश्चिम बंगाल की पत्रकारिता में एक बड़ा नाम हैं और फिलहाल सक्रिय हैं. मैं भी कोशिश में हूं कि अच्छा करूं और विश्वास भी है कि अच्छा कर जाऊंगा. ‘विश्वास’ यह शब्द मेरी लेखनी में जैसे ही आता है न जाने मैं कौन से विचारों में चला जाता हूं। पिता जी भरोसा करते थे, अपने मित्रों पर, साथ काम करने वाले कलमकारों पर, लेकिन विश्वास का मापदंड उनकी पुण्यतिथि के दिन समाप्त हो जाता है। बीते 9 वर्षों में उनका कोई समकक्ष न तो उन्हें याद करने आया और नाही हमारे परिवार की सुध ली। खैर हम मजबूत थे सो खड़े हो गये. मैं पत्रकारिता में सक्रिय हूं और रोजाना उन पुराने लोग जो पिता जी के साथ काम करते थे उनसे मिलना होता है। स्थानीय पत्रकार संघ में कई बड़े चेहरे पिता जी के जमाने से हैं। मेरे सक्रिय होते ही पिछले साल उन्हें पिता जी की याद भी आयी और इस बार उन्ही पुण्यतिथि संघ के बैनर तले मनाने की बात भी हुई, पर ऐसा हो न सका। सड़कों पर खड़ा होकर बड़ी बड़ी बातें करने वाले जब 9 सालों में याद न कर सके तो अब कोई ऊम्मीद लगाना बेमानी होगी। फिलहाल के लिये आप छक्के मारते रहिए और हम सबक लेते रहेंगे। जबतक कलम का साथ है सारण के पत्रकार स्व अवधेश श्रीवास्तव का नाम रौशन ही रहेगा। मेरे लिखने से अगर कोई आहत हो रहा है, तो होना भी चाहिए। क्योंकि जबतक आप आहत नही होंगे आपके लिये कोई आहट नही होगी। 

साभार:-प्रभात किरण हिमांशु
            वरीय पत्रकार 
            प्रभात खबर छपरा