सतर -नब्बे की उम्र में भी भारी पड़े भिखारी ठाकुर नाच मंडली के कलाकार
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◆नयी पीढ़ी के गायकों को भिखारी शैली गायन को दी सीख

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छपरा।बेशक हमारी नयी पीढ़ी के उर्जावान कलाकार अपनी प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध किया पर सतर से पंचानबे वर्ष की उम्र के भिखारी ठाकुर जी के नाच के कलाकार सभी कलाकारों पर भारी पड़े और नयी पीढ़ी के कलाकारों को भिखारी शैली के गायन के लिए सिख भी।मलिक जी की जयन्ती पर उनके गांव कुतुबपुर में सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम में देर रात ग्रामीणों ने भोजपुरी के कलाकारों की गायकी ,नृत्य व वादन का लुत्फ उठाया।पर उम्र के सातवें व नौवें दशक पार कर रहे भिखारी ठाकुर जी के नाच के मूल समाजी कलाकार रामचन्द्र मांझी, लखीचंद ,छोटे रामचंद्र जी आदि जब बेटी बेचवा नाट्य संगीत लेकर मंच पर उतरे तो दर्शक दीर्घा पीन ड्राप साइलेंट मोड में आ गया और भाव विभोर होकर ठाकुर जी के गीत संगीत में गोते लगाया ।भिखारी ठाकुर रंग मंडल व शोध संस्थान छपरा के संचालक और भिखारी नाच के शोधार्थी जैनेंद्र दोस्त द्वारा मलिक जी की परिकल्पना और मौलिकता को बरकरार रखते हुए समयाभाव के कारण नाटक का संपादित अंश की प्रस्तुति में बेटी विलाप गीत सुन लोग भाव विभोर हो गये।कार्यक्रम में प्रज्ञा ठाकुर की सधी आवाज में भिखारी ठाकुर के गीत , छपरा के बाल कलाकार सुयश का तबला वादन ,अनिशा का कत्थ नृत्य, काव्या मिश्रा का शिव तांडव स्रोत पर भाव नृत्य ,फणिभूषण अकादमी के कलाकारों का शानदार सामुहिक भाव नृत्य की प्रस्तुति ने भोजपुरी गीत संगीत के माहौल में जायका बदलने का काम किया।कार्यक्रम के उत्तरार्ध में सृष्टि सिंह व सुनिता पाठक जैसी गायिकाओं से सजी वरिष्ठ कलाकार उदयनाराण सिंह की टीम ने बाप बेटी के पारम्परिक संवाद गीत बेरी बेरी बरजीले गीत कार्यक्रम की उंचाई प्रदान की।शिक्षिका प्रियंका कुमारी ने भिखारी लोक संगीत के तो लोक गायक रामेश्वर गोप और ब्यास अरुण ने खांटी माटी की अवाज में भिखारी ठाकुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की वहीं हास्य कलाकार सत्येंद्र दूरदर्शी ने हास्य रचना सुना कर अगले साल तक के लिए विदा ली।प्रशासन के पदाधिकारी रत्नेश कमल ,राजकुमार, श्रीनिवास ,महिला प्रसार पदाधिकारी मीरा शर्मा आदि ने प्रस्तुति के साथ कलाकारों को सम्मानित कर ठंड रात में भी जहां हौसलाअफजाई करते रहे वहीं प्रसिद्ध मंच संचालक शैलेश कुमार ने धारदार संचालन से अंत- अंत तक समारोह को बांधे रखा।