प्रस्तुति:- कुंजबिहारी शास्त्री दैनिक खोज खबर जिला संवाददाता मधेपुरा 
संकलन:- नौशाद आलम चौसा मधेपुरा
रूह को जलाकर कहाँ जा रहा है।
बेगूसराय जिला के बीहट की रहने वाली रंजना सिंह से कोई भी अपरिचित नहीं है यूं कहा जाए कर्मवीरंगाना कवियत्री ने बेगूसराय की धरती पर जन्म लिया है स्वर कोकिला शारदा सिन्हा के परिवार से आने वाली रंजना सिंह कविता में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है उस एरिया में कहीं भी कवि सम्मेलन हो अगर यह मौजूद न हो वह कवि सम्मेलन फीका रहता है आज हम दैनिक खोज खबर पाठकों के लिए उसकी कुछ लिखी कविता पाठकों के सामने पेश कर रहा हूं
बेवफा आशिक
नौशाद आलम की तरफ़ से दीदी को कविता सप्रेम भेंट
रूह को जलाकर कहाँ जा रहा है।
ख्वाब दिल मैं दिखाकर कहाँ जा रहा है।
तुझको चाही थीं खुद से भी ज्यादा,
फिर नजर छुपाकर कहाँ जा रहा है।
दिल मैं रखी थी इतनी हिफाजत से तुझे
दिल ये मेरा चुराकर कहाँ जा रहा है।
मैंने तुझ पे ही सिर्फ भरोसा किया है।
फिर मुँह फेरकर कहाँ जा रहा है।
तुझको मुझ पे विश्वास नहीं था अगर
घर मेरा सजाकर कहाँ जा रहा है।
आई थी नजर से नजर को मिलाने तुझसे रंजना
फिर यूं रंजना को रुलाकर कहाँ जा रहा है।
सोची थी बातें करूँगी मन
भर कर
फिर नजरें गिराकर कहाँ जा रहा है।
कवियत्री रंजना सिंह
बीहट बेगूसराय






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