वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए अपने स्वैच्छिक विकास निधि से धन आवंटित करने वाले जनप्रतिनिधियों से एक निवेदन –

♨सिवान : अभी देखा-देखी कई जनप्रतिनिधियों में वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए अपने स्वैच्छिक विकास निधि से धन आवंटित करने की होड़ लगी हुई है । अच्छा है, महामारी के कारण ही, कम से कम सोलर लाइट जैसे कमिशन खोर योजना से इतर तो हमारे ये जनप्रतिनिधि सोचने के लिए बाध्य तो हुए ।

अब समझने की यह जरूरत है कि अभी वित्तीय वर्ष 2019-2020 का यह अंतिम सप्ताह चल रहा हैं ।
क्या हमारे सांसद व विधायक के पास अपने स्वैच्छिक विकास निधि का वर्तमान वित्तीय वर्ष 2019-20 का पैसा बचा हुआ हैं ?

अगर स्वैच्छिक विकास निधि का पैसा वर्तमान वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह तक बचा हुआ है तो यह चिंता का विषय है । वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह तक विकास निधि का पैसा बचा रहना यह बताता है कि हमारे जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध नहीं है ।

दूसरी बात यह है कि अगर वर्तमान वित्तीय वर्ष का पैसा खर्च हो गया है तो आगामी वित्तीय वर्ष 2020-2021 के मद से आवंटित राशि खर्च होगा, अर्थात अभी धन रिलीज होने में काफी समय लगने वाला है ।

एक बात और कहना है कि इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए जनप्रतिनिधियों के द्वारा अपने स्वैच्छिक विकास निधि से जो भी धन आवंटित किया जा रहा है, उसका सदुपयोग स्थानीय प्रशासन एक सार्वजनिक टेंडर निकल कर करें, ताकि जनता को पता चलना चाहिए कि जनप्रतिनिधियों के द्वारा आवंटित राशि का इस्तेमाल कहा और किस कार्य के लिए किया गया ।

साथ ही साथ राशि आवंटित करने वाले सभी माननीय जनप्रतिनिधियों से आग्रह है कि आपके द्वारा आवंटित राशि का दुरुपयोग प्रशासन के द्वारा न हो इसके लिए आप अपने स्तर से तत्पर रहें व निगरानी रखने की कृपा करें ।

माननीय जनप्रतिनिधियों से एक आग्रह और हैं कि आप ने जो अपने विकास निधि से राशि आवंटित किया है, वह किस वित्तीय वर्ष की राशि हैं ? यह भी सार्वजनिक करने की घोषणा करने की कृपा करें । ✍नवीन सिंह परमार

[ लेखक वरिष्ठ पत्रकार व शंखनाद “सेन्टर फाॅर स्टडी रिसर्च एंड डायलॉग”, सीवान{बिहार} के समन्वयक है ।]