
लापरवाही चिकित्सकों को पड़ेगी भारी, मरीजों को सुरक्षा प्रदान करने को स्वास्थ्य विभाग गंभीर
👉पैर की जगह पित्त की थैली के ऑपरेशन पर चिकित्सक के विरुद्ध प्रशासनिक कार्यवाही
सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत हुई कार्यवाही
👉पेंशन में 10 प्रतिशत की कटौती के साथ तीन वार्षिक वेतन वृद्धि पर रोक
पटना/13 सितंबर: मरीजों के ईलाज के समय सरकारी चिकित्सकों को अब सावधान रहना होगा। ईलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर चिकित्सक के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही की जाएगी। सरकारी अस्पतालों में ईलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर ईलाज के साथ उनको सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की गंभीरता दिखी है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में श्रीकृष्ण मेमोरियल मेडिकल कालेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में पैर का इलाज कराने आयी एक महिला का चिकित्सकों ने पांव के स्थान पर पेट का ऑपरेशन कर उसकी पित की थैली निकाल दी। इस घटना का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने उक्त चिकित्सक के खिलाफ़ सख्त प्रशासनिक कार्यवाही की है। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर विस्तार से जानकारी दी है।
बीते आठ सितंबर को मीनापुर थाना क्षेत्र के बहवल बाजार गांव निवासी सुशीला देवी का एसकेएमसीएच में चिकित्सकों ने लापरवाही के कारण पैर के स्थान पर पेट का ऑपरेशन कर दिया। इस घटना के बाद पीड़ित महिला के परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जिसके बाद डॉ नंद किशोर मिश्र, तत्कालीन सहायक प्रध्यापक, सजर्री विभाग, श्री कृष्ण चिकत्सा महाविद्यालय, डॉ कृष्ण कुमार, तत्कालीन सीनियर रेजिडेंट (बिहार स्वास्थ्य सेवा), निश्चेतना विभाग, मुजफ्फरपुर के विरुद्ध विभागीय संकल्प संख्या-1167 और 1168 सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के नियम-17 के तह्त विभागीय कार्यवाही चलाई गई थी। विभागीय कायर्वाही में इन दोनों चिकत्सकों के विरुद्ध आरोप को प्रामाणिक पाया गया। विभागीय प्रक्रिया के सुसंगत प्रावधानों के द्वारा इन के विरुद्ध आरोप सिद्ध होने के उपरांत विभाग ने सख्त प्रशासनिक कार्यवाही का निर्देश जारी किया है।
पेंशन एवं वार्षिक वेतन वृद्धि में कटौती: जिसके बाद विभागीय निदेर्श के तह्त आरोपी डॉक्टर और अस्पताल के विरुद्ध पेंशन में 10 प्रतिशत की कटौती का दंड अिधरोपित एवं संसूचित किया है। साथ ही श्री कृष्ण चिकत्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, मुजफ्फरपुर के विरुद्ध में तीन वार्षिक वेतन वृद्धि को असंचयात्मक प्रभाव से रोक का दंड संसूचित किया गया है।
चिकित्सीय लापरवाही के इस आरोप में विभाग द्वारा नियमानुसार विहत प्रिक्रिया के द्वारा जाँच करते हुए सख्त प्रशासनिक कार्यवाही का निर्देश जारी किया गया है । पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए यह एक उपयुक्त कदम है|




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