रोज़ों में कुछ ज़रूरी अहतियात बरतें ताके आपको जिस्मानी और रूहानी फ़ैज़ हासिल करने में दिक़्क़त ना हो
आज़ाद मोहम्मद नेब
जयपुर 26 मई। इस सख़्त गर्मी के मोसम में माहे रमज़ान के रोज़े बस आया ही चाहते हैं। यह माह ख़ुसूसी इबादत और ख़ैर-ओ-बरकत का महीना है। इस माहे रमज़ान में अल्लाह ताला का अपने बंदों से मुतालबा यह है के वोह इस माह में अपनी ख़ुसूसी तरबियत करें और अपने अंदर तक़वा पैदा करें ताके साल भर तक उसके असरात हमारे ज़िंदगी और समाज पर भलाईयों की सूरत में ज़ाहिर होते रहें।
*रोज़े* में कुछ ज़रूरी अहतियात से इस सख़्त गर्मी के मुज़िर असरात से बचा जा सकता है.. 
*”सेहरी”*
जहां तक हो सके सेहरी में भर पेट ना खाएं, हल्की और मीठी ग़िज़ा लें।  मीठा दही,जो का मीठा सत्तू  लेना ज़्यादा बेहतर है,सत्तू में साफ़ धुली हुई खजूर मिक्सी के ज़रिए मिक्स कर के पीना और ज़्यादा बेहतर है..इस से भूख नहीं सताएगी और गुलूकोज़ की भी कमी नहीं होगी।
🔹 *”इफ़्तार”*
रोज़ा इफ़्तार के वक़्त साफ़ धुली हुई खजूर, लीची,अनार,मटके/घड़े का पानी या शरबत लेना बेहतर है..
🔹 *”बचें”*
इफ़्तार में नीम्बू का शरबत,आम,अंगूर खीरा, ख़रबूज़ा लेने से बचें.. यह एसिड पैदा करते हैं।
🔹जिन हज़रात को एसी.डी.टी की शिकायत रहती है, अफ़्तार के वक़्त वोह एक दो घूंट सादा पानी पिएं और कोई बेहतर एन्टासिड दवा जैसे रेनटेक डी,ओमेप्राज़ॉल डी, रेबाप्राज़ॉल डी वग़ैरह में से कोई एक दवा (सिर्फ़ एक टेब्लेट या केप्सूल) लें और 35/40 मिनट बाद कुछ खाएं।
🔹 *”अहतियात”*
सालन शौरबेदार खाएं, गोश्त का सालन पकवा रहे हों तो तरकारी के साथ शौरबेदार पकवाएं, भुनवा गोश्त ना खाएं.. सिरी खाने से बचें.. तली हुई चीज़ें ना खाएं, अचार से दूर रहें। जब भी घर से बाहर जाएं सिर ढक कर निकलें।
🔹 *”ख़ुसूसी हिदायत”*
जो हज़रात हार्ट, शूगर,बल्डप्रेशर,एसी.डी.टी. के मरीज़ हैं वोह रोज़े रखने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर ले लें।