संजय कुमार सुमन
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बिहार में सत्ताधारी दलों के बीच चल रहे विवादों से जहां बिहार की राजनीति में उथल-पुथल मची है। वहीं इन सब के बीच राष्ट्रपति चुनाव का शोर भी अब तेज हो चुका है।17 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मतदान होने जा रहा है। इसको लेकर बिहार के तमाम राजनीतिक दलों ने आज रविवार को अपने विधायकों की बैठक भी बुलाई।
राजद विधायक की बैठक में राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में अपने विधायकों को सख्त निर्देश देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कहा है कि चुनाव में जिसका वोट गड़बड़ होगा, आगे वो खुद उस विधायक का वोट काट देगें। उन्होंने बोर्ड पर चाक के माध्यम से सबको वोटिंग का तरीका समझाया। नियमों का हवाला देते हुए ये भी बताया कि बूथ के अंदर अपना कोई भी पेन और मोबाइल ले जाना मना है।इसी क्रम में उन्होंने अपने विधायकों को चेतावनी भरे लहजे में कहा – अगर वोटिंग में किसी का भी वोट खराब हुआ, तो अगले चुनाव में हम उसका टिकट खराब कर देंगे।’

इस दौरान लालू प्रसाद ने अपने विधायकों को महागठबंधन और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से जुड़े किसी भी मसले पर कोई बयानबाजी नहीं करने की हिदायत भी दी है।उन्होंने विधायकों से साफ़ कहा कि किसी भी न्यूज़ चैनल की डिबेट में न जायें। उन्होंने कहा कि ‘महागठबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भाजपा उम्मीदवार के लिए वोट करेगा।’ साथ ही कहा कि जो लोग कंफ्यूजन में रहते हैं, वो धोखा खाते हैं।

राजद विधायक दल की बैठक के बाद बाहर आये पार्टी के वरिष्ठ नेता-सह-वित मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि इस दौरान तेजस्वी और गठबंधन के मुद्दे पर कोई प्रस्ताव नहीं आया, न ही बैठक में किसी सदस्य ने कोई सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी के मुद्दे पर राजद विधानमंडल दल के फैसले पर अटल है। तेजस्वी पर पहले लिए गए फैसले में कोई बदलाव संभव नहीं है।
रविवार को जदयू ने विधायकों की बैठक बुलवाई थी।बैठक की अध्यक्षता सीएम नीतीश कुमार कर रहे थे। बैठक इसलिए भी अहम हो जाती थी क्योंकि जदयू का दिया हुआ चार दिन का अल्टीमेटम अब पूरा हो चुका है। तमाम झंझावातों के बीच भी राजद अडिग है कि तेजस्वी यादव इस्तीफा नहीं देंगे। बैठक के बाद जब जदयू विधायक बाहर आए तो उम्मीद थी कि शायद तेजस्वी पर कोई बड़ा फैसला इस बैठक में हो जाए।

लेकिन जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने ऐसी किसी भी अटकल को सिरे से खारिज कर दिया।वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि,’बैठक का मकसद राष्ट्रपति चुनाव के बारे में विधायकों को समझाना था।उन्हें वोट देने के तरीके से अवगत करवाया गया है।इस बैठक में तेजस्वी यादव या महागठबंधन के बारे में कोई भी चर्चा नहीं हुई है।

बताया जाता है कि ‘बैठक को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने सभी विधायकों को वोटिंग का तरीका बताया और कहा कि सभी विधायकों को पहली वरीयता का वोट रामनाथ कोविन्द को ही देना है। मोबाइल खुले रखने हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में संपर्क किया जा सके।सभी विधायकों को सुबह 10 बजे तक विधानसभा में पहुंचने का निर्देश दिया गया है।लेकिन न तो नीतीश कुमार ने और न ही किसी अन्य व्यक्ति ने तेजस्वी का नाम लिया है।’




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