
*रहमतों और बरकतों का यह मुबारक महीना है रमजान*
✍श्रीनारद संवाद सेवा-सीवान

♨इस्लाम धर्म में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इस पवित्र महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं। रमजान के महीने में सूर्योदय से लेकर सूर्योस्त तक रोजा रखा जाता है, इस दौरान कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है। पूरे महीने रात में विशेष नमाज अदा की जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं। रोजे को अरबी भाषा में सोम कहा जाता है। इसका मतलब होता है रुकना। रोजे चांद दिखने से शुरु होते हैं, जिस शाम को चांद दिखाई देता है, उसकी अगली सुबह से रोजे शुरू हो जाते हैं।
मुस्लिम धर्म में रोजा रखना अनिवार्य माना जाता है। लेकिन कुछ लोगों को छूट भी मिलती है। जैसे की बीमार, दूध पिलाने वाली महिला और अबोध बच्चों तो इस माह में रोजा रखने की छूट दी जाती है। लेकिन बाद में वो किसी दूसरे महीने में रोजा रख सकते हैं।
रमजान के महीने में रोजा रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इस दौरान व्यक्ति अपनी बुरी आदतों से दूर रहने के साथ-साथ खुद पर भी संयम रखता है। दिन में कुछ भी नहीं खाया जाता। लेकिन कहा जाता है कि खाने के अलावा व्यक्ति को खाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। रोजे के दौरान अगर कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, पीठ पीछे किसी की बुराई करता है, झूठी कसम खाता है, लालच करता है, या कोई गलत काम करता है तो उसका रोजा टूटा हुआ माना जाता है।
बताया जाता है कि रमजान के महीने में कोई भी नेक काम किया जाता है तो उसका 70 गुना सवाब (पुण्य) मिलता है। इसके अलावा इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी होती है, जिससे सवाब मिलता है। इसके अलावा पूरे साल में किए गए गुनाहों से माफी भी मांगी जा सकती है।
रमजान को अरबी भाषा में रमादान कहा जाता है। इस मौके पर दुनियाभर के मुसलमान रोजे रखते हैं।दुनिया भर के मुसलमान पहली बार कुरान के उतरने की याद में रमजान के पूरे माह रोजे रखते हैं । दुनिया भर में मुसलिम समुदाय के लिए रमजान का माह काफी अहमियत रखता है । रहमतों और बरकतों का यह महीना बेहद मुबारक महीना माना जाता है।इस बार भारत में पहला रोजा ही 15 घंटे लंबा होगा ।
👉इनपुट: हसनपुरा ( सीवान) से वसीम आलम




Recent Comments