
यक्ष्मा उन्मूलन अभियान को अक्टूबर माह में दिया जाएगा व्यापक स्वरूप, 2023 तक टीबी मुक्त होगा सारण
· अभियान की सफलता के लिए जुड़ेंगे 100 प्राइवेट चिकित्सक
· स्टेट पीपीएम ने की जिले में यक्ष्मा उन्मूलन अभियान की प्रगति की समीक्षा
· सारण जिले को 2023 तक ही टीवी मुक्त बनाने का लक्ष्य
· 325 मरीजों को किया गया चिन्हित किया गया
छपरा : प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट “यक्ष्मा मुक्त भारत” को सफल बनाने के लिए अक्टूबर माह से व्यापक अभियान सारण जिले में शुरू किया जाएगा। इसकी कवायद विभाग के द्वारा शुरू कर दी गई है। वैसे तो, 2025 तक भारत को टीवी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन सारण जिले को 2023 तक ही टीवी मुक्त बनाने का लक्ष्य है। दरअसल टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू होने के 2 वर्ष पहले ही टीवी मुक्त सारण पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया था। यक्ष्मा के मरीजों को चिन्हित करने और उनकी जांच तथा उपचार की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। बिहार राज्य यक्ष्मा उन्मूलन अभियान को सफल बनाने में सहयोग कर रही विलियम जे क्लीनसन फाउंडेशन के स्टेट पीपीएम डॉक्टर प्रणति राय ने बताया कि बिहार के 28 जिले को टीवी मुक्त बनाने का अभियान चल रहा है।इस मौके पर जिला यक्ष्मा पदाधिकारी रत्नेश्वर प्रसाद सिंह, जिला मूल्यांकन सह अनुश्रवण पदाधिकारी भानू शर्मा समेत अन्य सभी चिकित्सा कर्मी मौजूद थे।
अभियान में 35 प्राईवेट डॉक्टरों को जोड़ा गया, 100 का है लक्ष्य:
डॉ. प्रणति राय ने बताया कि इस अभियान की सफलता में प्राइवेट चिकित्सकों की काफी महत्वपूर्ण भूमिका है और उन्हें इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक जिले के 35 प्राइवेट चिकित्सकों को इस अभियान से जोड़ा गया है। अक्टूबर माह में एक सौ नए चिकित्सकों को इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। डॉ राय ने बताया कि इस तरह का प्रयोग दरभंगा में किया गया है, जो काफी सफल व सराहनीय रहा है। उसी की तर्ज पर यहां भी इस अभियान को प्रारंभ किया गया है।
सुविधाओं के कार्यान्वयन की हो रही है मॉनिटरिंग:
यक्ष्मा मरीजों को चिन्हित करने, सरकारी अस्पताल तक उन्हें लाने, उनकी जांच कराने और उन्हें दी जाने वाली सभी सुविधाओं की कार्यान्वयन की मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्राइवेट नर्सिंग होम से इस वर्ष 4800 मरीजों को चिन्हित करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक 325 मरीजों को ही चिन्हित किया जा सका है । डॉ राय ने बताया कि अक्टूबर माह में 100 नए चिकित्सक को इस अभियान से जोड़ने के बाद इसमें व्यापक प्रगति व सुधार होने की संभावना है । इसकी कवायद शुरू कर दी गई है।
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तर्ज पर चलेगा अभियान:
सिविल सर्जन डॉ माधवेश्वर झा ने बताया कि टीवी मुक्त भारत बनाने की योजना को सफल बनाने में प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्हें व्यापक स्तर पर इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पब्लिक-प्राइवेट- पार्टनरशिप की तर्ज पर निजी चिकित्सकों का सहयोग लेकर इस अभियान को सफल बनाने की कार्य योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि वैसे सभी मरीजों की यूनिवर्सल डीएसटी कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिन्हें 15 दिनों से खांसी है । खंखार खुन आता है । सीने में दर्द की शिकायत है । यक्ष्मा होने के कोई भी लक्षण पाया जाता है । इस प्रक्रिया के शुरू होने से प्रारंभिक दौर में ही यक्ष्मा मरीजों की पहचान हो सकेगी और उनका तत्काल प्रभाव से इलाज शुरू कर दिया जायेगा । इससे यक्ष्मा उन्मूलन अभियान को ससमय सफल बनाने में सफलता मिलेगी ।
क्या है लक्षण:
· पसीना आना टीबी होने का लक्षण है
· अधिक ठंड होने के बावजूद भीपसीना आना
· लगातार बुखार रहना
· शुरुआत में लो-ग्रेड में बुखार रहता हैलेकिन बाद संक्रमण ज्यादा फैलने परबुखार तेज होता चला जाता है।
· कमजोरी होना, लगातार थकावट महसूस होना
· वजन घटने लगता है। खानपान परध्यान देने के बाद भी वजन कम होता रहताहै।
· टीबी हो जाने पर खांसी आती है,जिसके कारण सांस लेने में परेशानी होतीहै। अधिक खांसी आने से सांस भी फूलनेलगती है।
बचाव के तरीके:
· 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने परडॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें।डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करे।
· मास्क पहनें या हर बार खांसने याछींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन सेकवर करें।
· मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग मेंथूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छीतरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहांनहीं थूकें।
· मरीज हवादार और अच्छी रोशनीवाले कमरे में रहे। साथ ही एसी से परहेजकरे।
· पौष्टिक खाना खाए, एक्सरसाइज वयोग करे।
· बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराबआदि से परहेज करें।




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