
• सिंचाई जल की सुविधा वाला महत्वाकांक्षी योजना के सर्वे का काम अंतिम चरण में
• कार्यरूप में परिणत होगी योजना, लगभग 3000 करोड़ की होगी लागत
• स्काडा तकनीक के माध्यम से बूंद-बूंद का रखा जायेगा हिसाब
• सारण में नहर से नदी तक, नदी से पोखर और तालाब तक फैलेगा पटवन का जाल
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छपरा(सारण)। भविष्य में सारण प्रमंडल अपने जल संसाधनों का अधिक निपुणता से उपयोग और प्रबंधन कर सकेगा। इसके लिए स्काडा सिस्टम (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन) लगाया जायेगा जिससे इसकी निगरानी और नियंत्रण होगा। सारण लोकसभा क्षेत्र के सांसद सह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रुडी की इस महत्वाकांक्षी योजना को अब मूर्तरूप दिया जायेगा। सारण प्रमंडल की सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन की इस वृहद योजना का सर्वे अब अपने अंतिम चरण में है। लगभग 3000 करोड़ की इस योजना को सर्वे के बाद कार्यरूप में परिणत किया जा सकेगा। इस संदर्भ में सांसद रुडी ने बताया कि सारण में मही, डबरा, नून और तेल जैसी कई स्थानीय नदियाँ विविध कारणों से अस्तित्वहीन हो गई हैं। अब फिर से इन्हें सदा नीरा नदी के रूप में विकसित किया जाना है, ताकि किसानों को सालोंभर सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होता रहे। सूखी नदियों और अन्य जलाशयों का एरियल सर्वे का कार्य अब अपने अंतिम चरण मे है। इससे पुख्ता जानकारी उपलब्ध कर तदनुसार कार्य किये जायेंगे। सांसद ने योजना के संदर्भ में बताया कि नहर प्रणाली जिस रूपांकित जलश्राव के लिए विकसित किया गया है उतना जलश्राव नहरों में कैसे प्रवाहित हो, किसी भी नहर प्रणाली के माध्यम से अंतिम छोर तक नहर का पानी आवश्यकतानुसार कैसे पहुँचे। अधिक से अधिक खेती योग्य भूमि कैसे सिंचित हो तथा बाढ़ अवधि में बाढ़ के पानी को तालाब/पोखर इत्यादि में संचयन कर आवश्यकतानुसार सिंचाई में उपयोग किये जाने, वेस्ट लैंड का विकास करने जैसे कार्य है जिससे जिले के विकास को नया आयाम मिलेगा।
सांसद ने कहा कि आने वाले दिनों में हर खेत को पानी की व्यवस्था में बूंद-बूंद का हिसाब रखा जायेगा। इसके लिए स्काडा सिस्टम लगाया जायेगा जिसका एक नियंत्रण कक्ष होगा जहां से पानी वितरण की निगरानी की जायेगी। स्काडा सिस्टम लागू होने से एक निर्धारित स्थान से पूरी पानी सप्लाई की मॉनिटरिंग आधुनिक तरीके से की जा सकेगी। यदि कहीं पानी की बर्बादी भी हो रही है तो उसकी पहचान कर रोकने में मदद मिलेगी। मालूम हो स्काडा एक बहुत ही महत्वपूर्ण तथा फायदेमंद तकनीक है जिसका उपयोग औद्योगिक संगठनों द्वारा की जाती है। इस तकनीक की मदद से किसी भी डाटा की रियल टाईम ट्रैकिंग की जा सकती है। इसके लिए पिछले सप्ताह मैंने जल संसाधन व ऊर्जा विभाग के सचिव संजीव हंस, वेप्कॉस के संजय शर्मा, जल संसाधन विभाग के सारण प्रमंडलीय तीनों जिलों के मुख्य अभियंताओं व अन्य वरीय विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना को शीघ्र मूर्त्तरूप देने की पहल की है। विदित हो कि गंडक नहर परियोजना से सारण को उसके हक का पूरा पानी नहीं मिल पाता है या मिलने वाले पानी का सही ढंग से उपयोग नही हो पाता है। इसके लिए सांसद रुडी ने वर्ष 2019 में संसद में भी इस मामले को उठाया था और आंकड़ा पेश करते हुए सरकार को यह बताया था कि पिछले 50 वर्षों में 48 लाख क्यूसेक पानी बिहार को नहीं मिला है। पानी के अभाव में सिवान, गोपालगंज और सारण के लगभग 2 करोड़ किसानों के लिए सिंचाई की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस महत्वकांक्षी योजना के पूरा होने के बाद सारण ही नहीं बल्कि आसपास के अन्य जिलें भी लाभान्वित होंगे।




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