मकर संक्रांति पर श्रधालुओ ने लगायी गंगा मे आस्था की डुबकी-:
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डोरीगंज(सारण):
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मकर संक्रांति के अवसर पर आज सुबह से ही धार्मिक नगरी चिरान्द
के गंगा सोन के संगम तट पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डूबकी लगायी। इस
दौरान धार्मिक नगरी चिरान्द के तिवारी घाट, बंगाली बाबा घाट, जहाज घाट,
मेला घाट तथा डोरीगंज घाट पर हजारो श्रद्धालुओ द्वारा आस्था के संगम में
डूबकी लगा कर स्थानीय मंदिरों में पूजा अर्चना की गयी।
धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं
मकेर संक्रांति का त्योहार सूर्य के उतरायन होने पर मनाया जाता है। यह
त्योहार धर्म के मुख्य त्योहारों में से एक है। जब सूर्य मकर रेखा से
गुजरता है तब सूर्य उतरायन होता है। कभी कभी यह एक दिन पहले या बाद में
होता है। इस त्योहार का सम्बंध पृथ्वी के भूगोल से सीधा सूर्य की स्थिति
है। तब सूर्य मकर रेखा पर आ जाता है और यदि ज्योतिषि तौर पर देखे तो इस
दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश कर जाता है और सूर्य की
उतरायन गति प्रारंभ हो जाती है। इस त्योहार को भारत में अलग जगह अलग अलग
रूप से मनाया जाता है। कहीं मकर संक्रांति तो कहीं लोहरी, कहीं पोंगल आदि
के रूप में मनाया जाता है।
मकर संक्रांति का महत्व
शास्त्रों के अनुसार खड़ के दिन अर्थात दक्षिणायन खत्म होकर अच्छे दिन
उतरायन आने का प्रतिक माना जाता है। इस लिए इस दिन जप, तप, स्नान आदि
करने का महत्व तथा स्नान का भी विशेष महत्व है।