“मकरस्थ होने वाले मार्तण्ड की प्रचण्ड रश्मियाँ आपके जीवन मे सुख समृद्धि वैभव और आरोग्यम् प्रदान करे ”
दैनिक खोज खबर ऑनलाइन वेबपोर्टल के मुरलीधर पाण्डेय 

कपिल मुनि के आश्रम पर जिस दिन मातु गंगे का पदार्पण हुआ था, वह मकर संक्रांति का दिन था। पावन गंगा जल के स्पर्श मात्र से राजा भगीरथ के पूर्वजों को स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी। कपिल मुनि ने वरदान देते हुए कहा था, ‘मातु गंगे त्रिकाल तक जन-जन का पापहरण करेंगी और भक्तजनों की सात पीढ़ियों को मुक्ति एवं मोक्ष प्रदान करेंगी। गंगा जल का स्पर्श, पान, स्नान और दर्शन सभी पुण्यदायक फल प्रदान करेगा।’

महाभारत में पितामह भीष्म ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था। उनका श्राद्ध संस्कार भी सूर्य की उत्तरायण गति में हुआ था। फलतः आज तक पितरों की प्रसन्नता के लिए तिल अर्घ्य एवं जल तर्पण की प्रथा मकर संक्रांति के अवसर पर प्रचलित है।

सूर्य की सातवीं किरण भारत वर्ष में आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देने वाली है। सातवीं किरण का प्रभाव भारत वर्ष में गंगा-जमुना के मध्य अधिक समय तक रहता है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण ही हरिद्वार और प्रयाग में माघ मेला अर्थात मकर संक्रांति या पूर्ण कुंभ तथा अर्द्धकुंभ के विशेष उत्सव का आयोजन होता है। मकर संक्रांति का मतलब होता हैं भगवान भास्कर का मकर राशि में प्रवेश करने का काल  ।यह केवल एक खगोलीय  घटना नहीं है ।यह जीवन का एक व्यावहारिक, धार्मिक, सामाजिक, आथिर्क घटना हैं ।एक पिता और पुत्र की विचारधारा आपस मे नहीं मिलती हैं लेकिन फिर भी पिता/ज्येष्ठ/श्रेष्ठ के आगमन पर सम्पूर्ण सनातन संस्कृति के वाहक हिन्दू कम्बल ,तिल गुड ,चावल,दाल ,द्रव्य आदि का दान करते हैं ।खिचड़ी जो समरसता का प्रतिक हैं पूरे समाज को देकर उत्सव मनाते हैं ।आज राष्ट्र विरोधी शक्तियां हिन्दू. समाज को छिन्न भिन्न करने के लिए अनेकों प्रकार से षड्यंत्र रच रही हैं।अतः हमे इन षडयंत्रकारीयो से सावधान रहना है।

,”मकरस्थ होने वाले मार्तण्ड की प्रचण्ड रश्मियाँ आपके जीवन मे सुख समृद्धि वैभव और आरोग्यम् प्रदान करे “