दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-
पश्चिम चम्पारण जिला को खुले में शौचमुक्त बनाने के सरकारी निर्देश के तहत जिला प्रशासन अपने अधीनस्थ अधिकारियों को सख्त फरमान जारी कर रहा है और आनन् फानन में ओडीएफ सिर्फ कागज पर हो रहा है, धरातल पर ऐसा कुछ नही हैं। जिला को ओडीएफ घोषित करने को लेकर एक ऑफिसर दूसरे ऑफिसर को टॉर्चर कर रहा है, कि ओडीएफ घोषित करें नहीं तो उनका वेतन रोक दिया जाएगा। उसको लेकर अधीनस्थ पदाधिकारी जल्दी-जल्दी जैसे-तैसे कर डाटा फीडकर रिपोर्ट भेज देता है, धरातल पर फिर वही बात रह जाती है। गौनाहा के ओडीएफ घोषित पंचायत में मुरली कांड हुआ, जिसमे गन्ना के खेत में शौच को गई किशोरी की बलात्कार के बाद नृसंस हत्या होती है तो ऐसे में ओडीएफ घोषित करने का क्या औचित्य हैI वास्तविकता कुछ और ही होता है, उपर्युक्त बातें उक्त बातें बानुछापर पंचायत के सरपंच बसंत कुमार और आप के जिला मीडिया प्रभारी दिग्विजय राय ने “डेली वर्ल्ड” को एक मुलाकात में कही । उन्होंने कहा कि पंचायत सचिव के पद पर ऐसे लोग हैं जो सही ढंग से काम भी नहीं कर पाते है। वे जनप्रतिनिधियों को साल भर से कोई मानदेय अभी तक नहीं दिया गया है, सिर्फ यहां-वहां दौड़ाया जा रहा हैI दूसरी और पंच राजमती देवी ने कहा कि हमें साल भर से सिर्फ दौड़ाया जा रहा है। किंतु अभी तक उन लोगों की निर्धारित राशि अभी तक नहीं दी गई है। बीडीओ से बात करने पर कहते हैं कि पहले बेंच-कुर्सी खरीदा जाएगा, तब जनप्रतिनिधियों की राशि निर्गत की जाएगी । जनप्रतिनिधियों का कहना है कि वे लोग दौड़त-दौड़ते थक गये है। जिला में ओडीएफ का ढोल पीटा जा रहा है जबकि समाहरणालय के दरवाजा पर स्थित शौचालय ही महीनों से बंद पड़ा है। इससे पता चलता है कि ओडीएफ की क्या स्थिति होगी? आम आदमी पार्टी के जिला मीडिया प्रभारी दिग्विजय राय का कहना है कि जिन जगहों को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है वहां सडक पर गुज़ारना मुश्किल हैI नाक पर रुमाल रखे बगैर लोगों का सड़क पर चलना मुहाल हैI श्री राय ने कहा कि यह बड़ी प्रसन्नता की बात है कि जिला को ओडीएफ घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है और प्रशासन इसमें लगा हुआ है काम तेज़ हो रहा है यह सराहनीय हैI अलबता जिला प्रशासन इस दिशा में ठोस कार्य करे और देखे कि कम से कम 80 से 90 प्रतिशत कार्य हो तब ओडीएफ घोषित करे अन्यथा गाँव का गाँव शौचालय विहीन हो और पंचायत ओडीएफ घोषित इसपर ध्यान देने की आवश्यकता हैI