दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट:-
बेतिया : सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य बेतिया में जोरों पर है और अतिक्रमणकारियों पर भी हाईकोर्ट के आदेश अनुसार करवाई हो रहा है। यह अच्छी बात है क्योंकि शहर में जाम की बहुत बड़ी समस्या थी। लेकिन बहुत से बस्तियों को भी तोड़ने का आदेश दिया गया है। बस स्टैंड के सारे दुकानों को तोड़ने का आदेश दिया गया है। जिसका हम समर्थन नहीं करते लेकिन हाईकोर्ट के आदेश का हम सम्मान करते हैं और कोर्ट से गुहार लगाते हैं की इन गरीबों का भी ख्याल रखा जाए। अगर सड़क को चौड़ा करने के लिए इन दुकानों को और बस्तियों को तोड़ना है तो तोड़ा जाए पर इन दुकानदारों को सरकार कहीं अलग जगह पर दुकान की व्यवस्था करके थे और इन बस्तियों में रहने वाले गरीब लोगों के लिए सरकार स्लम बस्ती बनाएं। जिससे गरीबों को समस्या ना हो।
बस स्टैंड के दुकानदारों को उचित समय दिया जाए और उनके लिए दूसरे जगहों पर दुकान की व्यवस्था की जाए। क्योंकि इन गरीब दुकानदारों की रोजी रोटी सिर्फ और सिर्फ इनके दुकानों से चलती हैं और हमें कोई हक नहीं बनता कि हम किसी का रोजी-रोटी छीन ले। बेतिया में बहुत सारी अवैध कॉलोनिया है जो राज के जमीन पर बसी है और बहुत सालों से बसी है। इन सारे कलोनी को दिल्ली की तर्ज पर वैध किया जाए। तथा किसी भी गरीब का घर न टूटे इसका ध्यान रखा जाए। बहुत से बड़े-बड़े नेताओं का घर अवैध जमीन पर कब्जा कर बना हुआ है पर उन पर कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है। हॉस्पिटल रोड में बहुत बड़े बड़े डॉक्टरों का नर्सिंग होम कब्जा करके जमीन पर बना है या नगर परिषद के नियमों का पालन किए बिना बना है जिस कारण आए दिन जाम में मरीज उनके परिजन और एंबुलेंस घंटों फसे रहते हैं पर उन पर कार्यवाही नहीं हो रहा है आखिर क्यों।
अगर किसी कारणवश किसी गरीब का घर टूटता है तो सरकार उसके लिए उचित व्यवस्था करें। मनीष कश्यप ने सरकार से मांग की है कि बेतिया में सरकार मुंबई के तर्ज पर दो स्लम बस्ती का निर्माण करें। जिसमें गरीबों को घर दिया जाए और दो नए मार्केट का निर्माण करें जिसमें रोड चौड़ीकरण के समय जिन लोगों का दुकान तोड़ा जा रहा है उन्हें रोजी रोटी के लिए नया दुकान दिया जाए। अगर सरकार इन मांगों को नहीं मानती और किसी भी कारणवश गरीब दुकानदार और गरीब लोगों को समस्या होगा तो बृहत जन आंदोलन होगा और इसके लिए सरकार जिम्मेवार होगी।





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