बेतिया – नरकटियागंज *संस्कृत महाविद्यालय में दो सदस्यीय टीम ने की जांच।

जांच में पाई गई कई अनियमितता
न्यूज इनपुट विजय कुमार शर्मा पश्चिमी चंपारण बिहार:–
नरकटियागंज :-नरकटियागंज जानकी दास उपशास्त्रीय संस्कृत महाविद्यालय के निरीक्षण के लिए कामेश्वर प्रसाद विश्वविद्यालय से दो सदस्यों को समिति भेजा। पति तिवारी के अध्यक्षता वाली इस समिति ने महाविद्यालय के सारे तथ्यों की एक एक कर जांच शुरू किया। शुरूआत भवन निरिक्षण किया जिसमें पूर्व में कई भवनों को बिना विश्वविद्यालय के अनुमति के ही तोड़ दिया गया है। बेंच और डेस्क के जगह खाना बनाने का समान और चौकी बिछावन रखा पाया गया। उसके बाद महाविद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र सिंह से महाविद्यालय परिसर में चल रहे दुकान से हो रहे आय के मामले में जानकारी ली। प्राचार्य ने बताया कि दुकानदार मात्र 150 से 200 महिने का किराया देते हैं। इस पर समिति ने फटकार लगाई कहा कि उस महंगाई के जमाने में इतनी सस्ते दर पर दुकान कैसे दिया गया।प्राचार्य ने बताया कि पुर्व के सचिव के द्वारा उन दरो पर दुकान आवंटित किया गया है। फिर फाइल की जाच की गई तो प्राचार्य ने बताया कि सभी अलमारियो और कमरों कि चाभी पुर्व के सचिव के पास ही है जो मुझे अभी तक नहीं मिला है। पुर्व सचिव से पुछा गया तो बताया कि किसी भी व्यक्ति का चयन सचिव पद के लिए नहीं हुआ था तो मै अपने को अभी तक सचिव मान रहा हूँ। जबकि नियम के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने के तीन महीने तक ही पुर्व सचिव रह सकते हैं। प्रभारी प्राचार्य डॉ जितेंद्र सिंह से इस बावत बताया कि जब मैं प्राचार्य होकर आया तो उस उपशास्त्रीय महाविद्यालय के कुछ कर्मचारियों कि मिलीभगत से कुछ दबंग लोग हस्तगत कर लेना चाहते थे। लेकिन मैने विश्वविद्यालय और भूमिदाता परिवार के सहयोग से बचाने सफलता प्राप्त किया है अब इस महाविद्यालय को शिक्षा का केन्द्र बनाना है। विश्वविद्यालय से आये प्रतिनिधि पति तिवारी और डाॅ आर पी चौधरी ने बताया कि महाविद्यालय के समस्याओं और यहां के सभी तथ्यों से हम अवगत हो चुके हैं। अब हम इसकी लिखित सूचना विश्वविद्यालय को देगें तथा महाविद्यालय को बचाने का प्रयास करेगे। वहीं भूमिदाता परिवार के सदस्य सह अधिवक्ता धीरज कुमार पाण्डेय ने कहा की कुछ बड़े रसूख वाले लोग ओर अपने आप को समाज के स्वघोषित अगुआ इस महाविद्यालय पर अवैध कब्जा करना चाहते थे इसकी सूचना सक्षम पदाधिकारी को पत्र लिखकर सुचना दे चुका हूं।




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