बेटी तो मंदिर की घंटी है, बजने पर आरती होनी चाहिए।
बाह रे बहुओं डटल रहऽ, काम निकाले खातिर सटल रहऽ ।
काब्य समारोह में डुबा रहा मशरक। 
रोहित कश्यप की रिपोर्ट 
मशरक   :   सारण 
प्रखंड क्षेत्र के श्रीअवध उच्च विद्यालय चैनपुर चरिहारा के प्रांगण में आयोजित विराट कवि सम्मेलन में कवियों के काव्य पाठ से सराबोर हो गया। पेन्सनर सह वरिष्ठ नागरिक कल्याण संगठन के तृतीय वार्षिकोत्सव समारोह के तीसरे व अंतिम सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का उद्घाटन मढौरा एसडीओ संजय कुमार राय ने दीप प्रज्वलित कर किया। उतर प्रदेश के बलिया पोलिटेकनिक काॅलेज के पूर्व प्राचार्य व साहित्यकार चर्चित कवि हीरालाल अमृत पुत्र ने जब सुनाया- बेटी तो मंदिर की घंटी है, जब यह बजे तो आरती होनी चाहिए- –। पर पुरा श्रोता वर्ग वाह वाह कह उठा। तालियो की गरगड़ाहट से कविता और बेटी की अच्छाई की भूरि भूरि प्रशंसा की गई। कवि ओमप्रकाश राजापुरी की गजल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि रवीन्द्रनाथ सिंह ‘रवि’ ने अपनी गजल- बढ रही है दूरिया और घट रही है नजदीकियाॅ सुना कर लोगों की खुब वाह वाही लुटी। हमर देशवा बाटे सबसे निराला, गीता के ज्ञान देला गाय चरावे वाला’ पंक्ति जब मदन प्रसाद श्रीवास्तव ने सुनाया। पुरा पंडाल तालियो की गरगड़ाहट से गुॅज उठा। कवि सत्देव तिवारी ने- वाह रे बहुओं डटल रहऽ, काम निकाले खातिर सटल रहऽ । श्रोताओं द्वारा काफी सराही गई। हास्य कवि सत्येन्द्र दुरदर्शी ने अपनी हास्य ब्यंग्य से श्रोताओं को देर शाम तक कवि सम्मेलन मे जमे रहने पर मजबुर कर दिया। इस अवसर पर कवि चन्देश्वर गोस्वामी, शत्रुघ्न सिंह, शिवजी सिंह सुमन, घनई सिंह, शैलेश सिंह सहित दर्जनों कवियों ने अपनी कविता पाठ की। अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए संगठन के स्थायी अध्यक्ष राष्टपति पुरस्कृत प्राचार्य रामजीवन सिंह जीवन ने अपनी कविता से दिग्भ्रमित समाज और कुब्यवस्था पर करारा चोट करते हुए भावी पीढ़ी को सावधान किया। मंच संचालन कवि रविन्द्र नाथ सिंह ‘रवि’ ने किया।