• धूप से मिलने वाला विटामिन-डी नावजात शिशु के लिए लाभकारी
• नवजात के रोने पर घबराएं नहीं
• शिशु को छह माह तक कोई भी ऊपरी आहार न दें

छपरा/ 20 नवम्बर: बदलते मौसम में नवजात शिशुओं विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। तापमान में गिरावट के कारण मौसम के साथ रहन-सहन की शैली में भी परिवर्तन आ जाता है और इस दौरान ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है। बड़ों की अपेक्षा बच्चों की त्वचा ज्यादा नाजुक होती है इसलिए सर्दियों के मौसम में बच्चों की देखभाल ज़्यादा करनी पड़ती है।
सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रविशंकर प्रसाद ने बताया कि बच्चे ईश्वर की अनमोल कृति होते हैं। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है। शिशु को छह माह तक सिर्फ माँ का ही दूध पिलाना चाहिए। स्तनपान कराते समय शिशु को सही तरीके से गोद में लेना चाहिए। शिशु को दिन की तरह रात में भी दूध पिलाना चाहिए। शिशु को छह माह तक कोई भी ऊपरी आहार नहीं देना चाहिए। बच्चों के रोने पर यह जरूरी नहीं है कि उसे तकलीफ है। रोना बच्चे के लिए एक अच्छा अभ्यास भी है। उसके रोने पर उसे मारें या डाँटें नहीं, बल्कि उसे प्यार से चुप कराएँ। यदि ज्यादा रोए तो डॉक्टर को दिखाएँ।

सुबह की धूप है जरूरी : डॉ प्रसाद ने कहा कि नावजात शिशु के लिए धूप से मिलने वाला विटामिन-डी बहुत लाभकारी होता है, खासकर जब मौसम सर्दी का हो। रोजाना शिशु को लगभग 15 से 20 मिनट तक धूप में रखने से जॉन्डिस जैसी बीमारी नहीं होती । सुबह की धूप दिखाने से शिशु का इम्यून सिस्टम भी अच्छा होता है, और बच्चे को अच्छी नींद भी आती है। लेकिन अगर आपके शिशु की त्वचा संवेदनशील है तो उसे धूप में न ले जाएँ साथ ही धूप से आंखो को हमेशा बचाएं।
रोज़ाना न नहलाएँ: अपने नवजात शिशु को ठंड से बचाने के लिए उन्हें रोज़ाना नहीं नहलाएँ। इसके बजाय हर दूसरे दिन गर्म पानी में सॉफ्ट एंटीबैक्टीरियल लिक्विड डालकर शिशु के शरीर को नर्म तौलिया की सहायता से अच्छे से साफ कर दें। जिससे बच्चे की त्वचा भी साफ हो जाएगी और उसे ठंड भी नहीं लगेगी।
साफ ऊनी कपड़ों का करें इस्तेमाल : हल्की ठंड को नजरअंदाज कभी नहीं करना चाहिए, और मौसम में परिवर्तन की शुरुआत से ही बच्चों को गर्म कपड़े और मोजे पहनाना शुरू कर देना चाहिए। लेकिन ये ध्यान जरूर रखें कि जिस ऊनी कपड़ों का आप इस्तेमाल कर रहे हैं वो साफ हो। इसलिए ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छे लिक्विड डिटर्जेंट से धोएँ ताकि स्किन एलर्जी न हो।
गर्म तेल की मालिश है जरूरी : नवजात शिशु के लिए तो मालिश बहुत जरूरी होती है, जिससे उनके शरीर को आराम के साथ मजबूती भी मिलती है। सर्दियों में मालिश और भी जरूरी हो जाती है, क्योंकि तेल मालिश त्वचा में नमी बरकरार रहती है और त्वचा रूखी नही होती।

मां के दूध का कराएं नियमित सेवन: नवजात शिशु के लिए मां के दूध को अमृत माना जाता है। ऐसे में सर्दियों में उसका दिन में कम से कम 4-5 बार सेवन करवाना बेहद फायदेमंद होता है. इससे उसे मौसमी बीमारियों से बचने में मदद मिलती है।