पुराने पेड़ बचाने और नए पेड़ लगाने का युवाओं ने लिया संकल्प

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर माँ यूथ ऑर्गेनाईजेशन, जलालपुर के द्वारा विभिन्न कार्यक्रम किये गये

(पेड़ बचाने व नए पेड़ लगाने का संकल्प लेते बच्चे)

दैनिक खोज खबर, छपरा

माँ यूथ ऑर्गनाइजेशन में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नए पेड़ लगाने व पुराने पेड़ बचाने का संकल्प युवाओं को दिलाया. इस दौरान माँ यूथ ऑर्गनाइजेशन के बंगरा स्थित कार्यालय में कई कार्यक्रम किए गए.

सर्वप्रथम इसके सदस्यों ने शपथ ली कि कोई भी ऐसा कार्य नहीं ₹ करेंगे जिससे हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे। ऐसा करने से रोकने के लिए अन्य लोगों को भी जागरूक करेंगे। साथ ही ऐसे कार्य करेंगे जो पर्यावरण संरक्षण के हित में हो और ऐसा भी करने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगे.

संगठन के सदस्यों द्वारा नये पेड़ लगाने के साथ-साथ पुराने पेड़ों को बचाने का भी प्रण लिया गया। इसे एक नई मुहिम के रूप में चलाने का निर्णय लिया गया।

(पेड़ बचाने व नए पेड़ लगाने का संकल्प लेते बच्चे)

इस अवसर पर संगठन के द्वारा पर्यावरण संरक्षण के विषय पर निबन्ध प्रतियोगिता भी कराई गई। साथ ही संगठन द्वारा लोगों के बीच निःशुल्क पौधे भी बांटे गये। सदस्यों के द्वारा भी पौधारोपण किया गया।

इस मौके पर संगठन के सदस्य राठौर श्रीमान्त ने विश्व पर्यावरण दिवस के बारे मे बताते हुए कहा कि हम घर मे ही अपने स्तर पर बहुत सी अच्छी आदतें अपनाकर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण संरक्षण कर सकते हैं। कई आदतें जीवन में अपनाकर व अपनी दैनिक गतिविधियों मे सुधार करके हम पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने क‌र्त्तव्यों को आसानी से निभा सकते हैं।

संगठन की सदस्या मधु ने बताया कि लगातार बढ़ रही आबादी, औद्योगीकरण, अनियंत्रित शहरीकरण, कृषि अवशेषों का जलाया जाना, वनस्पति ईधन, वाहनों कारखानों द्वारा छोड़ा जाने वाला धुंआ, नदियों तालाबों में गिरता दूषित जल, वनों का कटान, खेतों में कीटनाशकों और उर्वरकों का असंतुलित प्रयोग, पहाड़ों में भूस्खलन, मिट्टी का कटाव, पोलिथिन के उपयोग आदि से पर्यावरण असंतुलित होते जा रहा है।

(विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में निबंध लिखती युवतियां)

अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि मनुष्य अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए प्रकृति से छेड़छाड़ कर भावी पीढ़ी के लिए मुसीबतें पैदा कर रहे हैं। इसलिए अपनी और भावी पीढ़ी की सुरक्षा के लिए ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण से प्रकृति को बचाना होगा।

मृत्युंजय ने कहा कि कहा कि औद्योगिक विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अधाधुंध दोहन किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाता है।पर्यावरण प्रदूषण पूरे मानव समाज की समस्या है। इसे रोकने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।