नौ वर्षों से नहीं हो रही गणित और हिन्दी की पढ़ाई

✍परवेज अख्तर/सिवान;
सीवान : प्रखंड के हाईस्कूल सह इंटर कॉलेज में नौ वर्षों से गणित और हिन्दी की पढ़ाई ही नहीं होती है। विवादों से घिरे इस स्कूल को अभी गुणवत्ता से भी समझौता करना पड़ रहा है। गणित और हिन्दी जैसे विषय की पढ़ाई के लिए बच्चों को वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है। स्कूल के 9 वें वर्ग में 2 सेक्शन में 275 छात्र-छात्राएं हैं। जबकि 10 वीं में 3 सेक्शन में 326 छात्र-छात्राएं है। वहीं इंटर के लिए अभी 11 वीं में नामांकन की प्रक्रिया चल रही है। जबकि 12 वीं में आर्ट्स में 116 छात्र-छात्राएं है। साइंस में 109 छात्र-छात्राओं का नामांकन है। हाई स्कूल में 6 नियोजित शिक्षक के साथ एक क्लर्क, एक चपरासी व एक नाईट गार्ड है। इंटर में 14 शिक्षक हैं। हाई स्कूल में गणित, हिन्दी व म्यूजिक के शिक्षक नहीं हैं तो इंटर में हिन्दी व वनस्पति विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। अब स्कूल में भवन की समस्या नहीं है। क्योंकि पुराने भवन से नवनिर्मित दो मंजिला भवन में 4 मई 2019 को स्कूल शिफ्ट हो गया। जिसमें कुल 14 कमरे हैं।

2018 में स्कूल में विवाद चरम पर रहा

हाई स्कूल हड़सर धनौती का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है। 2017-18 में वित्तीय अनियमितता को लेकर यह स्कूल सुर्खियों में रहा। शिकायत मिलने पर जिलास्तरीय टीम ने मामले की जांच की। जांच के दौरान डीडीसी ने तत्कालीन हेडमास्टर आशा कुमारी को निलंबित कर दिया। आशा कुमारी के निलंबन के बाद 21 जनवरी 2019 को हेडमास्टर का प्रभार सुनील यादव को मिला। स्कूल के सही ढंग से संचालन व शिक्षकों के बीच सामंजस्य पैदा करने के लिए बीईओ दरौंदा अजय कुमार ने 22 जनवरी 2019 को स्कूल में जाकर शिक्षकों के साथ एक बैठक की। बीईओ ने शिक्षकों से कहा कि स्कूल के दामन पर लगे दाग को आप सभी के प्रयास से साफ किया जा सकता है। आप सभी एक टीम भावना से काम करें। शिक्षकों ने भी बीईओ को आश्वासन दिया कि शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। हालांकि विवादों ने स्कूल का पीछा अभी तक नहीं छोड़ा है। अभी तक तत्कालीन प्रभारी हेडमास्टर आशा कुमारी ने वर्तमान प्रभारी हेडमास्टर सुनील यादव को पूर्ण प्रभार नहीं दिया है। परन्तु इसका असर स्कूल के पठन-पाठन पर नहीं है।

क्या कहते हैं हेडमास्टर

स्कूल के प्रभारी हेडमास्टर सुनील यादव ने कहा कि स्कूल में गणित व हिन्दी के शिक्षक नहीं हैं। इसकी लिखित जानकारी कई बार जिले के वरीय अफसरों को दी गई है। हालांकि इन विषयों की वैकल्पिक व्यवस्था कर पढ़ाई कराई जाती है। स्कूल में चहारदीवारी का नहीं होना भी एक गंभीर समस्या है। अभी तक हमें पूर्ण प्रभार नहीं मिला है। बावजूद इसके पढ़ाई पर इसका कोई असर नहीं है। सबकुछ पटरी पर आ गया है।